फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गोवा मुक्ति दिवस: जब भारतीय सेना ने पुर्तगालियों को खदेड़ा, वायुसेना ने आकाश में संभाला था मोर्चा

Thu, 19 Dec 2019 11:12 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
गोवा स्वतंत्रता संग्राम - फोटो : Social Media
विज्ञापन

भारत को मिली आजादी के 14 साल बाद आज ही के दिन भारतीय सशस्त्र बलों ने संयुक्त कार्रवाई कर गोवा को पुर्तगाली शासन से आजादी दिलाई थी। सैन्य कार्रवाई की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद पुर्तगाली गोवा को छोड़ने के पक्ष में नहीं थे। जिसके बाद भारत की तीनों सेनाओं ने 19 दिसंबर 1961 को ऑपरेशन विजय के तहत पुर्तगालियों को गोवा से खदेड़ दिया।

विज्ञापन


गोवा अपना स्थापना दिवस 30 मई को मनाता है क्योंकि इसी दिन 30 मई, 1987 को गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। जिसके बाद यहां भारतीय संविधान पूर्ण रूप से लागू हो गया।

कब आए पुर्तगाली
मार्च 1510 में अलफांसो-द-अल्बुकर्क के नेतृत्व में गोवा पर पुर्तगालियों का पहला आक्रमण हुआ। चूंकि गोवा के पास तब कोई सेना नहीं थी इसलिए बिना किसी संघर्ष के यह खूबसूरत जगह पुर्तगालियों के कब्जे में आ गया। इसके बाद भारत के यूसूफ आदिल खां ने पुर्तगालियों को गोवा से खदेड़ने के लिए हमला किया। जिसके बाद पुर्तगाली वापस भाग गए, लेकिन बाद में अल्बुकर्क ज्यादा बड़ी सेना के साथ लौटा और उसने इस समुद्र तटीय शहर पर फिर से कब्जा कर लिया। 
विज्ञापन


पुर्तगालियों ने एक हिन्दू तिमोजा को गोवा का प्रशासक नियुक्त किया। इसके साथ ही गोवा भारत में पुर्तगाली साम्राज्य की राजधानी बन गया। इसे लिस्बन के समान नागरिक अधिकार दिए गए और 1575 से 1600 के बीच यह शहर आर्थिक व सामाजिक रूप से भारत में सबसे आगे हो गया। पुर्तगालियों ने गोवा पर अपना कब्जा मजबूत करने के लिये वहां नौसैनिक अड्डे बनाए। उन्होंने गोवा के विकास के लिए खूब खर्च भी किया। 

पुर्तगालियों को खदेड़ अंग्रेजों ने गोवा पर जमाया कब्जा

1809-1815 के बीच नेपोलियन ने पुर्तगाल पर कब्जा कर लिया। 1815 से 1947 तक गोवा अंग्रेजों के अदीन रहा। पूरे हिंदुस्तान की तरह अंग्रेजों ने वहां के भी संसाधनों का जमकर शोषण किया। वह अंग्रेजों के समुद्री व्यापार का मुख्य केंद्र भी बनकर उभरा। 

आजादी के बाद गोवा को अंग्रेजों ने पुर्तगालियों को सौंपा
1947 को भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो गया लेकिन गोवा पर फिर से पुर्तगालियों से कब्जा कर लिया। दरअसल अंग्रेजों ने चाल के तहत और पुर्तगाल के दबाव के कारण गोवा को फिर से उनके हवाले कर दिया। हालांकि, जवाहर लाल नेहरू ने अग्रेजों से कई बार गोवा को भारत के अधीन करने की मांग की थी।

गोवा में राष्ट्रवाद का उदय, लोहिया को जेल भेजा
1928 में गोवा की स्वतंत्रता को लेकर मुंबई में डॉ टीबी कुन्हा की अध्यक्षता में गोवा कांग्रेस समिति का गठन किया गया। जिसके बाद वहां अंग्रेजों और पुर्तगालियों से आजादी को लेकर छिटपुट संघर्ष होते रहे। साल 1946 में समाजवादी नेता डॉ राम मनोहर लोहिया के गोवा पहुंचने से वहां का स्वतंत्रता आंदोलन तेज हो गया। जब लोहिया ने नागरिक अधिकारों के हनन के विरोध में गोवा में सभा करने की चेतावनी दी तब उनको गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

भारत सरकार के अनुरोध को पुर्तगालियों ने ठुकराया

तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, रक्षामंत्री कृष्ण मेनन और गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कई बार पुर्तगाली शासन से अनुरोध किया कि वे गोवा को खाली कर दें, लेकिन हर बार उनकी मांग ठुकरा दी गई। उस समय दमन-दीव भी गोवा का हिस्सा था। 1954 के मध्य में गोवा के राष्ट्रवादियों ने दादर और नगर हवेली की बस्तियों पर कब्जा कर लिया और भारत समर्थक प्रशासन की स्थापना की। 

गोवा में सेना का "ऑपरेशन विजय"
भारत सरकार ने जब देखा की बातचीत से पुर्तगाली गोवा को खाली करने को तैयार नहीं हो रहे तब 1961 में थलसेना, वायुसेना और नौसेना को युद्ध के लिए तैयार हो जाने के आदेश दिया गया। मेजर जनरल केपी कैंडेथ को 17 इन्फैंट्री डिवीजन और 50 पैरा ब्रिगेड का प्रभार मिला। भारतीय सेना की तैयारियों के बावजूद पुर्तगालियों पर किसी भी प्रकार का असर नहीं पड़ा।
विज्ञापन

गोवा में घुसी भारतीय सेना और पुर्तगाली शासन का हुआ खात्मा

गोवा में हवाई कार्रवाई करने की जिम्मेदारी एयर वाइस मार्शल एरलिक पिंटो के पास थी। भारतीय वायु सेना के पास उस समय छह हंटर स्क्वॉड्रन और चार कैनबरा स्क्वाड्रन थे। इसके बाद आठ और नौ दिसंबर को वायुसेना ने पुर्तगाली ठिकानों पर अचूक बमबारी की। थलसेना ने जमीनी और नौसेना ने समुद्री मार्ग से घेराबंदी बढ़ा दी।

चारों तरफ से घिरा देखतक 19 दिसंबर 1961 को तत्कालीन पुर्तगाली गवर्नर मैन्यू वासलो डे सिल्वा ने भारत के सामने समर्पण समझौते पर दस्तखत कर दिया। इसके साथ ही गोवा, दमन और दीव से  पुर्तगालियों के 451 साल पुराने औपनिवेशक शासन का खात्मा हो गया। 20 दिसंबर 1962 को दयानंद भंडारकर गोवा के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें