हाल के दिनों में गैर-भाजपा शासित राज्यों में राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के बीच टकराव देखने को मिले हैं। ऐसे में गोवा के राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई ने टकराव से बचने के लिए सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि किसी भी विवाद या टकराव से बचने के लिए दोनों पक्षों को अपनी लक्ष्मण रेखा का सम्मान करना चाहिए।
पिल्लई ने कहा कि एक लक्ष्मण रेखा है जिसके भीतर लोकतंत्र के प्रत्येक स्तंभ को काम करना चाहिए। अगर कोई इस रेखा को पार करता है तो उसके बाद संविधान के पास इसका कोई उपाय नहीं है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान सभा में हुई चर्चाओं से पता चलता है कि इसके सदस्यों ने कभी भी ऐसी स्थिति की उम्मीद नहीं की थी जिसमें लोकतंत्र के तीन स्तंभ - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में टकराव होगा।
गोवा के राज्यपाल पिल्लई का यह बयान ऐसे समय में आया है जब केरल, तमिलनाडु, दिल्ली, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, पंजाब और झारखंड जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के बीच कई मुद्दों पर खींचतान देखने को मिल रही है। किसी विशेष घटना का जिक्र किए बिना पिल्लई ने कहा कि दूसरे राज्यपालों के अपने-अपने मुख्यमंत्रियों के साथ संबंध के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। लेकिन जहां तक मेरा संबंध है, मैंने अनुभव किया है कि अगर आप सम्मान देते हैं, तो आपको बदले में सम्मान मिलता है।
लोगों ने राज्यपाल के रूप में मेरी नियुक्ति का विरोध किया...
पिल्लई ने कहा कि अक्टूबर 2019 में जब उन्हें मिजोरम का राज्यपाल बनाया गया तो कुछ राजनीतिक दलों ने बयान जारी कर कहा कि मिजोरम को हिंदू कट्टरपंथियों को राज्य में स्वीकार नहीं करना चाहिए। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा, क्योंकि मैं केरल भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष रह चुका हूं। जिस कारण उन्होंने राज्यपाल के रूप में मेरी नियुक्ति का विरोध किया। लेकिन कुछ महीनों के बाद ही उन्होंने मान लिया कि मैं उनकी बेहतर सेवा कर रहा हूं और मेरे उनके साथ बहुत अच्छे संबंध भी थे।
जनता ही महान है
गोवा के राज्यपाल ने आगे कहा कि किसी पद पर बैठे व्यक्ति में उदारता, जिम्मेदारी और ईमानदारी होनी चाहिए। मेरा मानना है कि एक-दूसरे के लिए सम्मान इसका मापदंड होना चाहिए क्योंकि संविधान के तहत और हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत जनता ही महान है।