फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जांबाज की जयगाथा: पिता की यूनिट में तैनाती से सीडीएस बनने तक का गौरव, पूर्वोत्तर में उग्रवाद को खत्म करने से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक को दिया अंजाम

Thu, 09 Dec 2021 05:44 AM IST
सुभाष कुमार न्यूज डेस्क, अमर अजाला, नई दिल्ली

सार

जनरल बिपिन रावत  का जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद से रिटायर हुए थे।
विज्ञापन
जांबाज की जयगाथा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

तमिलनाडु के कुन्नूर में बुधवार दोपहर जब सेना के एमआई-17वी-5 हेलीकॉप्टर क्रैश होने की खबर आई तो पूरा देश सन्न रहा गया। इस हेलिकॉप्टर में देश के चीफ आफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत कई लोग सवार थे। शाम होते-होते वह खबर आई, जिसने हर भारतवासी की आंखें नम कर दीं, खबर थी रावत के निधन की। इस हादसे में उनकी पत्नी मधुलिका समेत 13 अन्य लोगों की भी जान चली गई।

विज्ञापन


जनरल बिपिन रावत  का जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद से रिटायर हुए थे। उनकी मां का संबंध परमार वंश से था। जनरल रावत की प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के कैंबरीन हॉल स्कूल और शिमला में सेंट एडवर्ड स्कूल से हुई। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडक वासला से जुड़े। इसके बाद भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में प्रवेश लिया। यहां उन्हें ‘सोर्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया।

2011 में उन्हें सैन्य-मीडिया सामरिक अध्ययन पर शोधकार्य के लिए चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ की ओर से डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) से सम्मानित किया गया। वे फोर्ट लीवनवर्थ, अमेरिका में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंग्टन और हायर कमांड कोर्स के ग्रेजुएट भी रहे। उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज में एमफिल और मैनेजमेंट तथा कंप्यूटर स्टडीज में भी डिप्लोमा किया।

विज्ञापन

गोरखा राइफल्स में कमीशन
जनरल रावत को दिसंबर 1978 में 11 गोरखा राइफल्स में कमीशन मिला। खास बात यह है कि उनके पिता भी इसी यूनिट में अपनी सेवाएं दे चुके थे। उनके पास कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर में कामकाज का लंबा अनुभव था। 1986 में चीन से लगी सीमा पर इन्फेंट्री बटालियन के प्रमुख पद की जिम्मेदारी संभाली थी। चार दशकों की सेवा के दौरान ब्रिगेडियर, कमांडर, जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ सदर्न कमांड, मिलिट्री ऑपरेशन्स डायरेक्टोरेट में जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड, कर्नल मिलिट्री सेक्रेटरी समेत कई बड़े पदों पर रहे। संयुक्त राष्ट्र की पीस कीपिंग फोर्स का भी हिस्सा रहे और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में बहुराष्ट्रीय सेना ब्रिगेड की कमान भी संभाली।

जनरल रावत ने पूर्वोत्तर में उग्रवाद को खत्म करने में भी अहम भूमिका निभाई थी। उनकी देखरेख में वर्ष 2015 में म्यांमार में क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन चलाया गया था। मणिपुर में 18 सैनिकों की शहादत से देश में उबाल था। जनरल रावत ने पलटवार की रणनीति बनाई। इस सर्जिकल स्ट्राइक में सेना ने एनएससीएन के कई उग्रवादियों को मार गिराया था। उरी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद उनके नेतृत्व सेना ने 29 सितंबर 2016 को पाकिस्तान स्थित आतंकी शिविरों को ध्वस्त करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। 

43 साल का अनुभव

1. उच्च ऊंचाई युद्धक्षेत्र व आतंकवाद विरोधी अभियानों के विशेषज्ञ।
2. सैन्य सेवा के दौरान परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल और सेना मेडल से नवाजा गया।

उपलब्धियां

1. एनडीए से स्नातक की उपाधि प्राप्त।
2. आईएमए देहरादून में ‘सोर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित।
3. रक्षा एवं प्रबंध अध्ययन और स्ट्रैटेजिक व डिफेंस स्ट्डीज में एमफिल।
4. सैन्य मीडिया अध्ययन में पीएचडी।
5. सेना के आधुनिकीकरण में योगदान।
6. सैनिकों को मिलने वाली सुविधा बढ़ाने में अहम भूमिका।
7. सेना में महिलाओं को एंट्री दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान।
8. सेना को प्रोफेशनल आर्मी बनाने का श्रेय, सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसी उपलब्धियां।
9. कश्मीर में आतंकवाद के विरुद्ध आक्रामक नीति।
विज्ञापन

काबिलियत के दम पर चुने गए थे सेना प्रमुख
जनरल रावत 31 दिसंबर 2016 को थलसेना प्रमुख बने। काबिलियत के दम पर उन्हें दो सीनियर अफसरों पर तरजीह दी गई और यह पद दिया गया। 2019 में उन्हें देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया गया था। पद को बनाने का मकसद सेना के तीनों अंगों में सही तालमेल और कार्य-कुशलता को बढ़ाना था। अगर जनरल रावत जीवित होते तो 65 साल की उम्र तक इस पद पर रहने वाले थे।

पूरा न हो पाया थिएटर कमान का सपना
जनरल बिपिन रावत ने 1 जनवरी 2020 को देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) का पद संभालते ही चार इंटीग्रेटेड थिएटर कमान के गठन का काम शुरू कर दिया था। वह अपने तीन साल के कार्यकाल में इस लक्ष्य को पूरा करना चाहते थे। उनकी पूरी कोशिश रही कि इस साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक थिएटर कमान के गठन की घोषणा कर दें। लेकिन कई तकनीकी कारणों से ऐसा नहीं हो सका। जनरल रावत ने पिछले महीने ही सेना के तीनों प्रमुखों के साथ इंटीग्रेटेड कमान पर आखिरी उच्चस्तरीय बैठक की थी।

उन्होंने सरकार को चीन और पाकिस्तान से बढ़ते खतरों के मद्देनजर इंटीग्रेटेड कमान की सख्त जरूरत पर विस्तृत रिपोर्ट दी थी। सरकार की तरफ से भी उन्हें पूरा सहयोग मिल रहा था। उनसे जुड़े अधिकारियों के मुताबिक जनरल रावत इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए 63 साल की उम्र में भी ओवरटाइम काम कर रहे थे। यह फैसला लिया जा चुका था कि युद्ध की स्थिति में जल, थल और वायुसेना से मिल कर बने थिएटर कमान सीधे सीडीएस के तहत काम करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, जनरल रावत चार इंटीग्रेटेड थिएटर कमान के तहत पूर्वी और पश्चिमी भाग में दो लैंड ओरिएंटेड कमान, एक मेरिटाइम कमान और एक एयर डिफेंस कमान के गठन पर काम कर रहे थे। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें