ग्लोबल वार्मिंग धरती को सिर्फ गर्म नहीं कर रही, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर मौसम को जोड़ने वाली प्राकृतिक कड़ियों को भी कमजोर कर रही है। एक नए अध्ययन के मुताबिक दक्षिण एशियाई मानसून और भूमध्यसागर के बीच बना महत्वपूर्ण मौसमी संबंध इस सदी के दूसरे हिस्से तक लगभग खत्म हो सकता है। इसका भारत पर सीधा असर तुरंत दिखाई देना जरूरी नहीं है, लेकिन मानसून की बदलती चाल और उसके दूरगामी प्रभावों का अनुमान लगाना भविष्य में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
दक्षिण एशिया में गर्मियों के दौरान मानसून सक्रिय होता है तो गर्म और नमी से भरी हवा तेजी से ऊपर उठती है। इससे वायुमंडल में बड़ी मात्रा में गर्मी पहुंचती है। इस प्रक्रिया का असर हजारों किलोमीटर दूर भूमध्यसागर के ऊपर हवा की गतिविधियों पर भी पड़ता है।मानसून के सक्रिय होने पर भूमध्यसागर के ऊपर हवा नीचे की ओर उतरती है। इससे बादल बनने की प्रक्रिया कमजोर होती है और गर्मियों में बारिश की संभावना घटती है। यानी दक्षिण एशिया में होने वाली मानसूनी गतिविधि भूमध्यसागर के गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क मौसम को भी प्रभावित करती है।वैज्ञानिक इस दूर के संबंध को मानसून-डेजर्ट मैकेनिज्म कहते हैं। यह मौसम की उन अदृश्य कड़ियों का उदाहरण है, जिनके जरिए एक क्षेत्र में होने वाली वायुमंडलीय हलचल हजारों किलोमीटर दूर दूसरे क्षेत्र के मौसम को प्रभावित करती है।
चीन के इंस्टीट्यूट ऑफ एटमॉस्फेरिक फिजिक्स के प्रोफेसर तियानजुन झोउ के नेतृत्व में हुए अध्ययन में मौसम और जलवायु से जुड़े आंकड़ों के साथ कई कंप्यूटर आधारित मॉडल इस्तेमाल किए गए।इस अध्ययन के नतीजे नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित हुए हैं।शोधकर्ताओं ने पाया कि इस्तेमाल किए गए कंप्यूटर मॉडल के 97.5 फीसदी सिमुलेशन में भविष्य में दक्षिण एशियाई मानसून का भूमध्यसागर के मौसम पर असर कमजोर होता दिखाई दिया। अनुमान है कि सदी के दूसरे हिस्से तक दोनों के बीच बना मौजूदा संबंध काफी हद तक खत्म हो सकता है।अध्ययन के मुताबिक अभी भूमध्यसागर में साल-दर-साल बारिश में होने वाले बदलाव को समझाने में दक्षिण एशियाई मानसून की भूमिका करीब 14.2 फीसदी है। भविष्य में यह घटकर केवल 5.1 फीसदी रह सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि भूमध्यसागर में बारिश का उतार-चढ़ाव कम हो जाएगा। इसका अर्थ है कि बारिश में होने वाले बदलाव को प्रभावित करने में दक्षिण एशियाई मानसून की भूमिका काफी छोटी हो जाएगी।वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के साथ दक्षिण एशिया में मानसून से जुड़ी गर्म और नम हवा पहले की तुलना में अधिक ऊंचाई तक पहुंच सकती है। इससे मानसून से पैदा होने वाली गर्मी के फैलने का तरीका बदल जाएगा।
इस बदलाव का असर भूमध्यसागर के ऊपर भी दिखाई देगा। वहां पूर्व और पश्चिम के बीच तापमान का अंतर कम हो सकता है। इसके कारण नीचे की ओर उतरने वाली हवा कमजोर पड़ सकती है। साथ ही निचले वायुमंडल में उत्तर से आने वाली हवाओं की ताकत भी घट सकती है।इस तरह दक्षिण एशिया से शुरू हुआ बदलाव भूमध्यसागर तक पहुंचकर वहां की स्थानीय मौसम प्रक्रिया के साथ मिल जाता है। नतीजा यह होता है कि मानसून का भूमध्यसागर के मौसम पर पहले जैसा असर नहीं रह जाता।
भारत पर क्या पड़ेगा असर
भारत के लिए इसका सबसे अहम पहलू मानसून के पूर्वानुमान से जुड़ा है। दक्षिण एशियाई मानसून पहले से ही समुद्र के तापमान, हवाओं और कई दूर-दराज के वायुमंडलीय कारकों से प्रभावित होता है। यदि इन प्राकृतिक संबंधों में बदलाव आता है तो भविष्य में मानसून के व्यवहार और उसके उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने के लिए वैज्ञानिकों को नए संकेतकों और बदलती मौसमी कड़ियों को भी ध्यान में रखना होगा। अध्ययन का महत्व सिर्फ भूमध्यसागर तक सीमित नहीं है। यह बताता है कि ग्लोबल वार्मिंग के साथ मौसम की वे कड़ियां भी बदल सकती हैं, जिन्हें वैज्ञानिक लंबे समय से अपेक्षाकृत स्थिर मानते रहे हैं।आज किसी क्षेत्र के मौसम का अनुमान लगाते समय वैज्ञानिक दूसरे क्षेत्रों में हो रही वायुमंडलीय गतिविधियों को भी ध्यान में रखते हैं। लेकिन अगर ये दूर के संबंध कमजोर होते हैं या उनका स्वरूप बदलता है तो पुराने अनुमान लगाने के तरीके उतने प्रभावी नहीं रह सकते।
बारिश के पैटर्न के साथ वायुमंडलीय संबंधों पर असर
प्रोफेसर तियानजुन झोउ के अनुसार बढ़ता वैश्विक तापमान केवल औसत तापमान और बारिश के पैटर्न को नहीं बदल रहा, बल्कि दुनिया के अलग- अलग हिस्सों के बीच मौजूद वायुमंडलीय संबंधों को भी नए सिरे से व्यवस्थित कर रहा है।
इस अध्ययन का बड़ा संदेश यही है कि ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती केवल बढ़ते तापमान और बदलती बारिश तक सीमित नहीं है। यह मौसम के उस अदृश्य नेटवर्क को भी प्रभावित कर रही है, जिसके जरिए दुनिया के एक हिस्से की गर्मी और हवा दूसरे हिस्से के मौसम को प्रभावित करती है। आने वाले वर्षों में इन बदलती कड़ियों को समझना मौसम वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।