धरती पर मौजूद पेड़ों की हर तीन में से एक प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है। इससे पृथ्वी पर जीवन संकट में पड़ सकता है। ‘ग्लोबल ट्री असेसमेंट’ ने अपनी हालिया रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है। ‘इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर‘ (आईयूसीएन) की ‘रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटेंड स्पीशीज‘ के तहत जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र के कॉप-16 शिखर सम्मेलन (कोलंबिया के काली शहर) के दौरान जारी रिपोर्ट में यह बात कही गई।
खत्म होते जंगलों से जलवायु परिवर्तन और सूखे का संकट
रिपोर्ट में कहा गया है कि जंगल तेजी से घट रहे हैं, पेड़ों को लकड़ी के लिए काटा जा रहा है। इसके चलते खेती और मानव विस्तार के लिए जमीन खाली की जा रही है। वहीं, जलवायु परिवर्तन भी सूखा और जंगल की आग जैसी समस्याओं के कारण एक अतिरिक्त खतरे को बढ़ा रहा है। विशेषज्ञ एमिली बीच ने कहा कि लोग खाने, लकड़ी, ईंधन और दवाओं के लिए पेड़ों की अलग-अलग प्रजातियों पर निर्भर करते हैं। पेड़ ऑक्सीजन बनाते हैं। साथ ही वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड जैसी ताप रोकने वाली गैसों को सोखते हैं। आईयूसीएन की महानिदेशक ग्रेथल एगुइलर ने कहा, पेड़ पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने के लिए जरूरी हैं और लाखों लोग अपने जीवन और आजीविका के लिए उन पर निर्भर हैं।