दुनियाभर में ग्लोबल वार्मिंग एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। इस समस्या से आज के समय में दुनिया का हर देश डरा हुआ है। कहीं औसत से कई गुना अधिक ठंड होना तो कहीं औसत से कई गुना अधिक गर्मी होना, सब इसी के परिणाम हैं। अब 210 विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें कहा गया है कि इस सदी के अंत तक हिंदू कुश पर्वतों के एक तिहाई से भी अधिक ग्लेशियर पिघल जाएंगे। इस माउंटेन रेंज को एशिया का वाटर टावर भी कहा जाता है।
इस खोज में पता चला है कि जहां एक तरफ पूर्वी क्षेत्र के ग्लेशियर खत्म होंगे, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी हिमालय के ग्लेशियर (जम्मू और कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड) में बढ़ोतरी होगी। ऐसा अधिक बर्फबारी के कारण हो सकता है।
हिंदू कुश पर्वत उत्तरी पाकिस्तान के विवादीत भाग से मध्य अफ्गानिस्तान तक विस्तृत एक 800 किमी चलने वाली पर्वत शृंखला है। इसका सबसे ऊंचा पहाड़ पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के चित्राल जिले में स्थित तिरिच मीर पर्वत है। हिंदू कुश का दूसरा सबसे ऊंचा पहाड़ नोशक पर्वत और तीसरा इस्तोर-ओ-नल है। इसे तीसरा पोल भी कहा जाता है, जिससे दो अरब लोगों को पानी उपलब्ध कराया जाता है।