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Glaciers: काराकोरम क्षेत्र में ग्लेशियर स्थिर स्थिति में, अन्य तेजी से पिघल रहे, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने दी जानकारी

Sun, 13 Feb 2022 09:05 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार हिंदुकुश, इंडस, गंगा और ब्रह्मपुत्र बेसिन के ग्लेशियरों के मुकाबले काराकोरम क्षेत्र के ग्लेशियर स्थिर अवस्था में हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने रविवार को बताया कि कारारोरम क्षेत्र में ग्लेशियर स्थिर अवस्था में हैं, लेकिन गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के बेसिन पर मौजूद ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में बताया कि हिंदुकुश हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की औसत दर 14.9-15.1 मीटर प्रति वर्ष रही। इंडस बेसिन में यह दर 13.2-12.7 मीटर प्रति वर्ष, गंगा में 15.5-14.4 मीटर प्रति वर्ष और ब्रह्मपुत्र में 20.2-19.7 मीटर प्रति वर्ष रही।

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मंत्रालय ने विभिन्न संस्थानों की ओर से किए गए अध्ययनों का उल्लेख करते हुए कहा, 'हालांकि, काराकोरम क्षेत्र में ग्लेशियरों की लंबाई में कम बदलाव दर्ज किया गया, जो कि स्थिर अवस्था का संकेत है।' मंत्रालय ने अपने स्वायत्त संस्थान नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (एनसीपीओआर) के जरिए साल 2013 से पश्चिम हिमालय क्षेत्र में स्थित चंद्र बेसिन में छह ग्लेशियरों पर नजर रख रहा है। बता दें कि चंद्र बेसिन करीब 2473 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। 

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने क्षेत्र सत्र 2021-22 के दौरान ब्यास बेसिन, दक्षिण चिनाब बेसिन और हिमाचल प्रदेश में चंद्रा बेसिन और लद्दाख में श्योक व नुब्रा बेसिन में ग्लेशियरों के पिघलने पर एक परियोजना शुरू की है। ग्लेशियरों के पिघलने का हिमालयी नदियों के जल संसाधनों पर बड़ी असर पड़ता है। ऐसा ग्लेशियर बेसिन हाइड्रोलॉजी में बदलाव, डाउनस्ट्रीम जल बजट, निर्वहन में भिन्नता के चलते विद्युत संयंत्रों पर असर, फ्लैश फ्लड और अवसादन के चलते होता है।

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माउंट एवरेस्ट पर भी तेजी से पिघल रही है बर्फ
बीते दिनों नेपाल में अनुसंधानकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि माउंट एवरेस्ट पर स्थित सबसे बड़ा ग्लेशियर इस शताब्दी के मध्य तक गायब हो सकता है। करीब दो हजार साल पुराना साउथ कोल ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है। नेटर पोर्टफोलिया में प्रकाशित एक आलेख के अनुसार एवरेस्ट पर बर्फ बहुत तेजी से फैल रही है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार 8020 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह ग्लेशियर लगभग दो मीटर प्रति वर्ष की दर से बेहद तेज गति से पिघल रहा है।
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