सर्वोच्च अदालत ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को दोबारा उनके पद पर नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। इसे केंद्र सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने आलोक वर्मा के उन तीन महीनों को वापस देने की बात कही है जो सरकार की वजह से खराब हुए हैं।
इस फैसले को केंद्र सरकार के लिए एक सबक बताते हुए प्रशांत भूषण ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार के एक गलत फैसले की वजह से देश के सर्वोच्च जांच एजेंसी के सर्वोच्च अधिकारी के बहुमूल्य तीन महीने बर्बाद हुए हैं। फैसले के समय कोर्ट को इस बात का संज्ञान लेना चाहिए था और उन्हें इसकी भरपाई करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि आलोक वर्मा को बाकी के समय में कोई बड़ा निर्णय लेने का अधिकार न देना किसी भी तरह से सही नहीं कहा जा सकता। इसकी समीक्षा होनी चाहिए।
एक अन्य वरिष्ठ वकील आभा सिंह ने कहा कि किसी भी संस्था में किसी भी कर्मचारी को बिना उसके द्वारा छुट्टी मांगे जाने के उसे छुट्टी पर नहीं भेजा जा सकता। यह सरासर ज्यादती वाली बात है। ऐसे में इस फैसले से न्याय हुआ है और उन्हें चोट मिली है जो लोग यह समझते हैं कि सिर्फ वही सही है जो वे सोचते हैं। आभा सिंह ने कहा कि यह फैसला पहली तारीख पर ही हो जाना चाहिए था। इसमें बहुत देरी हुई जिससे सीबीआई और खुद सरकार की साख पर भी आंच आई।
वहीं, भाजपा ने इस फैसले को लोकतंत्र को मजबूत करने वाला बताया है। भाजपा के प्रवक्ता सुदेश वर्मा ने कहा कि उनकी सरकार ने वही बात मानी थी जो ईडी के द्वारा कही गई थी। सरकार ने सीबीआई में पारदर्शिता लाने के लिए ही यह काम किया था। अब चूंकि यह सर्वोच्च अदालत का फैसला है, इसलिए सरकार उस फैसले को लागू कराने का काम करेगी।