देश के स्कूल-कॉलेजों के साथ-साथ अब तकनीकी शिक्षण संस्थानों में भी विद्यार्थियों को श्रीमद् भगवत गीता पढ़ाई जाएगी। आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर अन्य ग्रंथों को भी सिलेबस का हिस्सा बनाया जाएगा।
स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में हिंदू धर्म ग्रंथों को शामिल करने की दिशा में उठाए गए कदमों के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद में यह बात कही। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भगवत गीता को भारतीय शिक्षा प्रणाली में स्कूलों-कॉलेजों के पाठ्यक्रम से लेकर तकनीकी शिक्षण संस्थानों तक विभिन्न स्तरों पर सिलेबस का हिस्सा बनाया गया है।
मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की तरफ से सूचित किया गया है कि श्रीमद् भगवत गीता से संबंधित सामग्री पहले से ही कक्षा 11 और 12 की संस्कृत की पाठ्यपुस्तकों में शामिल है।
कक्षा छठी के सामाजिक विज्ञान विषय में एनसीईआरटी की इतिहास की पाठ्यपुस्तक 'हमारा अतीत' के एक पाठ में ‘व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री’ नाम के चैप्टर में गीता का संदर्भ दिया गया है। जबकि सातवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में 'हमारा अतीत- दो' के पाठ में छात्रों को ‘ईश्वर को पाने का भक्ति मार्ग’ में भी गीता के अंश को शामिल किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि जहां तक बात उच्च शिक्षा की है तो यूजीसी ने योग विषय पर राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) में गीता के कुछ अंशों को शामिल किया है। नेट परीक्षा देश में यूनिवर्सिटी के शिक्षकों की योग्यता परखने की एक परीक्षा है।
विश्वविद्यालयों का निर्माण/गठन संबंधित केंद्रीय/प्रांतीय/राज्य अधिनियम के तहत किया जाता है और ये स्वायत्त संस्थान होते हैं, जो अपने अधिनियमों, कानूनों और उसके तहत बनाए गए अध्यादेशों/विनियमों के आधार पर चलते हैं। इसलिए उन्हें किसी भी शिक्षण कार्यक्रम के लिए अपने सांविधिक निकायों की मंजूरी के आधार पर पाठ्यक्रम तय करने की स्वायत्तता हासिल हैं।
उन्होंने संसद को बताया कि इसके अलावा तकनीकी शिक्षा नियामक-अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई)-ने 2018 में स्नातक इंजीनियरिंग के मॉडल पाठ्यक्रम में 'भारत की पारंपरिक ज्ञान पद्धति' नाम का एक कोर्स शुरू किया था, जिसमें गीता के कुछ अंश भी शामिल किए गए हैं।