वैज्ञानिकों का मानना है कि इस उपग्रह से प्राकृतिक आपदा के साथ पृथ्वी पर चल रही छोटी-छोटी घटनात्मक गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। इसके अलावा कृषि, वन, खनन, बादल, बर्फबारी, ग्लेशियर क्षेत्रों के साथ और महासागरों में चल रही हर तरह गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी।
लॉन्चिंग से पहले मौसम का मिजाज अहम
इसरो के वैज्ञानिकों का मानना है कि जीआई-सैट1 की लॉन्चिंग से पहले मौसम का मिजाज अहम है। उपग्रह की लॉन्चिंग से पहले मौसम का मिजाज बदलता है या उसके अनुकूल नहीं रहता है तो मिशन को टाला जा सकता है।
जीएसएलवी-एफ10 की चौदहवीं उड़ान
जीएसएलवी-एफ10 इसरो का चौथी पीढ़ी का लॉन्चिंग व्हीकल है जो बृहस्पतिवार को 14वीं बार किसी उपग्रह को उसकी कक्षा में पहुंचाएगा। इसका तीन चरणों में निर्माण हुआ है जिसमें चार लिक्व्डि स्ट्रैप लगे हैं। पहले ही चरण से इसमें ताकतवर मोटर लगी है। इसरो ने इस उपग्रह में पहली बार चार मीटर व्यास वाला ओ आकार का पे-लोड प्रयोग किया है जो जीएसएलवी के साथ पहली बार मिशन पर निकलेगा।