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West Bengal: तारकेश्वर में चार साल की नाबालिग बच्ची का अपहरण और यौन उत्पीड़न; हिरासत में लिया गया एक व्यक्ति

Sun, 09 Nov 2025 06:39 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।

सार

West Bengal: पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर इलाके में चार साल की एक बच्ची के साथ कथित रूप से अपहरण के बाद यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। बच्ची का फिलहाल उपचार चल रहा है। पुलिस ने घटना में शामिल एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है और उस पर पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।  
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पुलिस मामले की जांच में जुटी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर में एक नाबालिग बच्ची का कथित तौर पर रेलवे शेड से अपहरण किए जाने और यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। 
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अधिकारियों ने बताया कि घटना शनिवार को उस समय हुई, जब बच्ची अपनी दादी के पास रेलवे शेड में शो रही थी। एक अधिकारी ने बताया कि बच्ची (चार वर्षीय) को इलाके में एक नाले के पास बेहोश और निर्वस्त्र हालत में चोट के निशाने के साथ पाया गया। 

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बच्ची कथित रूप से बंजारा समुदाय से ताल्लुक रखती है। उसको प्रारंभ में स्थानीय अस्पताल ले जाया गया और बाद में चंदननगर के उप-संभागीय अस्पताल में रेफर किया गया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि घटना के संबंध में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

हुगली (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक कामनाशीष ने कहा, जब बच्ची को अस्पताल लाया गया, तो अस्पताल ने पुलिस को इसकी सूचना दी। इसके बाद परिवार के सदस्यों से अस्पताल में संपर्क किया गया और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इसके बाद परिवार ने एक और शिकायत दर्ज कराई। घटना की पूरी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। बच्ची का उपचार चल रहा है और उसकी हालत अब ठीक है। जिस व्यक्ति को पुलिस हिरासत में लिया गया था, उसे आज अदालत में पेश किया गया। 

टीएमसी विधायक रमेंदु सिंघा रॉय ने पीटीआई को बताया, यह एक हैरान करने वाली घटना है, लेकिन यह रेलवे के क्षेत्राधिकार वाले इलाके में हुई। रेल पुलिस की तरफ से और सुरक्षा उपाय व निगरानी होनी चाहिए। हम बच्ची के परिवार के साथ हैं और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य अर्चना मजूमदार ने कहा कि आयोग ने इस घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा, हम कानूनी पहलुओं की जांच करेंगे, क्योंकि यह राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अधिकार क्षेत्र में भी आता है। अनुमति मिलने पर मैं एक-दो दिन में परिवार से मिलूंगी।

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इस बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि तारकेश्वर पुलिस शुरू में इस घटना पर प्राथमिकी दर्ज नहीं करना चाहती थी। अधिकारी ने एक्स पर एक पोस्ट में राज्य की 'फर्जी कानून-व्यवस्था की छवि बनाए रखने के लिए अपराध दबाने' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'ममता बनर्जी, आप एक असफल मुख्यमंत्री हैं। आपके शासन में पश्चिम बंगाल की कानून और व्यवस्था सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।' भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी तारकेश्वर थाने के बाहर प्रदर्शन किया और अपराधियों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग की।

भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा, ऐसे कई मामले हैं जिनमें पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर देती है। कोई व्यक्ति चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म कैसे कर सकता है? यह बेहद चौंकाने वाला है। केवल मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति ही ऐसा कर सकता है। यह दर्शाता है कि राज्य में कानून नाम की कोई चीज नहीं बची है। यह पूरी तरह से सांविधानिक व्यवस्था का पतन है। 
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कोलकाता में बंगाली समर्थक संगठन ने निकाली रैली
कोलकाता के डुम डुम इलाके में रविवार को एक बंगाली समर्थक संगठन ने रैली निकाली और एक नाबालिग (14 वर्षीय) दुष्कर्म पीड़िता के लिए न्याय और तीन आरोपी युवकों को सख्त सजा देने की मांग की। पुलिस ने आरोपी राजेश पासवान, विक्की पासवान और संजू साई को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली इस लड़कीको ट्यूशन से लौटते समय अगवा कर लिया था और एक छिपे हुए स्थान पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। बाद में उसे उसके घर के पास छोड़ दिया था। यह घटना अक्तूबर के आखिरी हफ्ते में हुई थी। इन आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

महिलाओं सहित सैकड़ों लोग हवाई अड्डे के गेट नंबर-1 से नागेरबाजार तक (करीब दो किलोमीटर) मार्च करते हुए पहुंचे। यह रैली कालीधन कॉलोनी और गोराबाजार से होकर गुजरी। रैली में लोगों ने आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। बांग्ला पोक्खो के महासचिव गर्ग चटर्जी ने कहा, राजनीतिक दल वोट खोने के डर से इस खौफनाक घटना पर चुप हैं। लेकिन हम तक सड़कों पर रहेंगे, जब तक अपराधियों को सजा नहीं मिल जाती और बंगाली बेटियां सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। 



 
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