तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार को राज्य विधानसभा में कई घोषणा की। इनमें 4,800 करोड़ रुपये की लागत वाली पेयजल परियोजनाएं और अपनी आजीविका, अधिकारों और मांगों को लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों और शिक्षकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना शामिल है।
नियम 110 के तहत घोषणाएं करते हुए विजय ने कहा कि इन फैसलों का मकसद जन-कल्याण को मजबूत करना, जरूरी सेवाओं में सुधार करना और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना है।
क्या है पेयजल कार्यक्रम?
किसानों के लिए क्या फैसला लिया?
उन्होंने तिरुवन्नामलाई जिले में सिपकॉट इंडस्ट्रियल एस्टेट का विरोध कर रहे किसानों पर दर्ज मामलों का जिक्र किया, जिनमें कुछ मामलों में किसानों पर 'गुंडा एक्ट' के तहत कार्रवाई की गई थी। विजय ने परंदूर में प्रस्तावित एयरपोर्ट के खिलाफ किसानों के विरोध-प्रदर्शन का भी ज़िक्र किया, जहां उन्होंने खेती की जमीन, जल स्रोतों और आजीविका के नुकसान को लेकर चिंता जताई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'वे सभी मामले भी वापस ले लिए जाएंगे। इस कदम से लोकतांत्रिक अधिकार और मजबूत होंगे और आम लोगों व सरकार के बीच भरोसा बढ़ेगा।'
क्या है वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना?
एक और घोषणा में, मुख्यमंत्री विजय ने तिरुनेलवेली और सलेम नगर निगमों में 'वेस्ट-टू-एनर्जी' (कचरे से ऊर्जा बनाने वाले) प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया।
मुख्यमंत्री ने ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के डिजिटलीकरण की भी घोषणा की। नई खरीदी गई गाड़ियों के लिए डिजिटल आरसी 15 सितंबर, 2026 से पूरे राज्य में उपलब्ध होंगे, जबकि ड्राइविंग टेस्ट पास करने वालों को उसी तारीख से उसी दिन डिजिटल लाइसेंस मिल जाएंगे।
इस बीच, विधानसभा में ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के सफाई कर्मचारियों के चल रहे विरोध-प्रदर्शन पर चर्चा हुई। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने रिपन बिल्डिंग्स में 15 दिनों से विरोध कर रहे 2,000 से ज्यादा कर्मचारियों का मुद्दा उठाया। ये कर्मचारी पक्की नौकरी, वेतन में बढ़ोतरी, ईएसआई और पीएफ बेनिफिट्स और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को रेगुलर करने की मांग कर रहे थे। मंत्री राजमोहन ने कहा कि सरकार आपसी सहमति से समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही है और कुछ फाइलें तैयार हैं।