राहुल गांधी, नरेंद्र मोदी और गुलाम नबी आजाद
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राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद ने महंगाई पर मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, "'बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार' का जुमला गढ़कर भाजपा और नरेंद्र मोदी ने सत्ता हासिल की थी, लेकिन सरकार बनने के पौने तीन साल के बाद स्थिति यह है कि हरेक चीज तीन से चार गुना महंगी हो गई है। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में 80 में से 73 सीट जीतने वाले भाजपा के सांसद संसद में प्रदेश का कोई भी मसला नहीं उठाते। विधानसभा चुनाव में यूपी की जनता को इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी को जिताना चाहिए।"
प्रेसवार्ता में आजाद ने कहा कि महंगाई की मुख्य वजह ‘मोदी टैक्स’ है। यूपीए सरकार के समय कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब घटकर 34 डॉलर हो गई है। इस हिसाब से इस वक्त पेट्रोल 30 रुपये और डीजल 20 रुपये लीटर होना चाहिए। मोदी संसद में डीजल-पेट्रोल की बढ़ी कीमत की वजह नहीं बताते। अब तो एटीएम से अपने पैसे भी निकालने पर सर्विस टैक्स देना पड़ेगा।
मोदी पद की गरिमा भूल चुके हैं
गुलाम नबी आजाद
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उन्होंने किसानों से भी कुछ वादा किया था, लेकिन नोटबंदी लागू कर उनकी परेशानी इतनी बढ़ा दी कि फसल बोने तक के लिए उनके पास रकम के लाले पड़ गए। उन्होंने युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन 20 करोड़ लोगों का रोजगार छीन लिया गया।
‘नारियल जूस’ मसले पर उन्होंने कहा कि उन्हीं के दल के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी कभी किसी मुख्यमंत्री पर टिप्पणी नहीं करते थे। इस तरह की टिप्पणी करना प्रधानमंत्री की गरिमा के खिलाफ है। मोदी का बस चले तो वो ब्लॉक प्रमुख की नकल उतारने लगें। मुख्यमंत्री अखिलेश और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तो उनसे उम्र में, ओहदे में, तजुर्बे में काफी छोटे हैं। मोदी अब तक इलेक्शन मोड में हैं। देश में, विदेश में, नगर पालिका, विधानसभा चुनाव में बस भाषण दिए जा रहे हैं।