जब गुलाम नबी आजाद से राज्यसभा में उनके और पीएम मोदी के रोने का पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि हम एक-दूसरे को जानते थे, इसलिए नहीं रो रहे थे। हम रो रहे थे कश्मीर में 2006 में गुजराती पर्यटकों की बस पर हुए हमले को याद कर। जब पीएम मोदी उस घटना का जिक्र कर रहे थे, तो मुझे लगा कि मैं 14 साल पहले उस पल में वापस आ गया था, जब हमला हुआ था... और मैं उस हमले से जुड़ी कहानी को पूरा नहीं कर पाया, खुद को भावुक होने से रोक नहीं पाया।
पीएम के रोने को लोग दिखावा कह सकते हैं, मैं नहीं : आजाद
कांग्रेस नेता शशि थरूर के प्रधानमंत्री मोदी के राज्यसभा में भावुक होने को लेकर दिखावे वाली परफॉर्मेंस बताए जाने पर गुलाम नबी ने कहा, अधिकांश लोग पृष्ठभूमि को नहीं जानते हैं। बहुत से लोगों ने सोचा होगा कि प्रधानमंत्री दिखावा कर रहे हैं, क्योंकि एक कांग्रेसी नेता जा रहा है, तो उन्हें परेशान होने की क्या जरूरत है। लेकिन उन्होंने मेरे लिए जो शब्द कहे वो उनकी भावना थी, जो राजनीति से अलग एक इंसान के तौर पर थी। उन्होंने कहा कि पीएम के रोने को लोग दिखावा कह सकते हैं, लेकिन मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता।