मध्यप्रदेश के राजनीतिक हालात पर गुलाम नबी आजाद ने संसद परिसर में गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी के साथ प्रेस कांफ्रेंस की। जिसमें उन्होंने भाजपा पर राज्य की सरकार को गिराने का आरोप लगाया। भाजपा पर आरोप लगाया गया है कि वह कमलनाथ सरकार को गिराने के लिए कांग्रेस विधायकों को 100-100 करोड़ रुपये और मंत्री पद देने की पेशकश की थी।
प्रेस कांफ्रेंस में गुलाम नबी आजाद ने कहा, 'मध्यप्रदेश सरकार गिराने की यह पहली कोशिश नहीं थी। ऐसा तीसरी या चौथी बार हुआ है। भाजपा राज्यसभा सांसदों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। वह किसी और की सरकार नहीं बनने देना चाहती। हम इस मुद्दे को संसद में जरूर उठाएंगे।'
आजाद ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, 'जबसे भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता में आई है तबसे राज्यों में एक-एक करके लोकतंत्र को खत्म किया जा रहा है। शुरुआत अरुणाचल प्रदेश से हुई थी जहां कांग्रेस की भारी बहुमत वाली सरकार को गिराया गया था। मणिपुर और गोवा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन सरकार बनाने के लिए भाजपा को न्यौता दिया गया। जम्मू-कश्मीर में भी यही हुआ। इसके बाद महाराष्ट्र में बहुमत नहीं होने के बाद भी भाजपा के मुख्यमंत्री को रातो-रात शपथ दिलाई गई है।'
उन्होंने दावा करते हुए कहा, 'अब मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार को गिराने का प्रयास हो रहा है। हमें पता है कि जब राज्यसभा चुनाव होता है तो दूसरी पार्टियों को गिराने का बुखार भाजपा को जरा तेज हो जाता है।' राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, 'विपक्षी दलों के नेताओं को ईडी, सीबीआई और आयकर से डराकर तोड़ा जाता है। मध्य प्रदेश में पहली बार प्रयास नहीं हो रहा है। यह तीसरी-चौथी बार ऐसे हो रहा है। हम संसद में भी इस पर चर्चा करेंगे। पूरे देश को भी इस तरह के प्रयासों के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा।'
अधीर रजंन चौधरी ने कहा, 'भाजपा मध्य प्रदेश में कांग्रेस को सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है। पहले भी उन्होंने कई प्रयास किए लेकिन राष्ट्रीय स्तर और प्रदेश स्तर के हमारे सक्षम नेतृत्व ने इसे नाकाम कर दिया। यह कुछ नहीं, बल्कि ‘न्यू इंडिया’ के नेता द्वारा इजात की गई खरीद-फरोख्त की राजनीति है। सभी राजनीतिक दलों को केंद्र सरकार के अधिनायकवादी रवैये के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा।'
बता दें कि मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर विधायकों के खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए थे। इसके बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि भाजपा ने उसके और बसपा के विधायकों को बंधक बनाया था। हालांकि 100 करोड़ रुपये और मंत्री पद का लालच भी हमारा ईमान नहीं खरीद पाया।