मेडिकल कॉलेज प्रशासन की बेहयाई के बीच मरीज बेबस थे तो तीमारदार बेचैन। ऑक्सीजन के अभाव में विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों की भीतर सांसें घुट रही थीं तो बाहर तीमारदारों की उम्मीद टूट रही थी। जब भी कोई शव वार्ड से बाहर आता था तो चीख-पुकार तेज हो जाती थी। अपनों की फिक्र में डूबे लोग हर लाश को अपना खास मानकर फफक उठते थे।
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मेडिकल कॉलेज में जो कुछ गुजर रहा था वह मरीजों के साथ तीमारदारों के लिए भी काफी त्रासद था। अपनों की जान बचाने की मंशा लिए उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर आए लोग उस पल को कोस रहे थे जब उन्होंने बीआरडी में बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलने की आशा में यहां आने का फैसला लिया था।
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ऑक्सीजन संकट छिपाने की कोशिश के बाद भी आखिरकार तीमारदार सच्चाई जान गए। एक के बाद एक हुई मौतों ने ‘कुछ गड़बड़ है’ के अंदेशे को हवा देनी शुरू की तो कुछ देर में हालात छिपाने के बाद भी जगजाहिर हो गए। फिर उन सभी तीमारदारों के चेहरे तनाव से सफेद हो गए जिनके मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत थी।
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मेडिसिन वार्ड, इंसेफेलाइटिस वार्ड, एनएनयू आदि के बाहर तीमारदार परेशान हाल ऊपर वाले को याद करने लगे।
बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज
- फोटो : ANI
100 बेड वार्ड के बाहर पडरौना के मृत्युंजय नवजात बेटे की खोज-खबर पाने को बेचैन खड़े थे। वार्ड में प्रवेश वर्जित होने से रह-रहकर बाहर से झांकने की कोशिश करने के साथ ही उनकी तड़प बढ़ती जा रही थी। वार्ड में ऑक्सीजन खत्म होने की उन्हें भनक लग चुकी थी। इससे उनकी बेचैनी बढ़ गई थी।
रानीपुर बस्ती के दीपचंद 11 माह की मासूम बेटी का शव लिए बाहर निकलते हुए बोल पड़े, ‘मेरी बेटी को लील लिया। जब ऑक्सीजन ही नहीं था तो भर्ती क्यों कर लिया।’ खोराबार के राधेश्याम इलाजरत पोती के बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे। भीगी आंखें पोछते हुए रुंधे गले से आवाज आई, दवा तो पहले से ही खरीद रहे थे और अब ऑक्सीजन भी खत्म है।
देवरिया के अमित सिंह बेटी प्रतिज्ञा के शव के साथ बाहर आए तो एक बार फिर इंसेफेलाइटिस वार्ड के बाहर चींखें तेज हो उठीं। अमित बोले, डॉक्टर बिना ऑक्सीजन के इलाज करते रहे, लेकिन रेफर नहीं किया। डॉक्टरों ने मेरी बेटी को मार डाला।
तीमारदार पंप करते रहे एंबुबैग
gorakhpur medical college
ऑक्सीजन संकट के बीच गंभीर मरीजों को एंबुबैग के जरिए ऑक्सीजन मुहैया कराई गई। तीमारदार कई घंटों तक एंबुबैग पंप करके अपने मरीजों को बचाने की जुस्तजू में जुटे रहे। इस कोशिश ने तीमारदारों को काफी थका दिया।
अपनों का शव पाने के लिए हुए परेशान
डीएम राजीव रौतेला की ओर से मामले की जांच के आदेश के बाद मृतकों के शव अस्पताल प्रशासन ने परिवारवालों को देने से मना कर दिया। इसके बाद लोग अपनों का शव पाने के लिए परेशान हो गए। हालांकि, उन्हें निराशा मिली।
सिलेंडर की सप्लाई के लिए रेट ज्यादा होने के बावजूद किया इलाहाबाद की कंपनी से ‘करार’
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लिक्विफाइड ऑक्सीजन के अलावा ऑक्सीजन सिलेंडर की भी सप्लाई होती है। लिक्विफाइड ऑक्सीजन की आपूर्ति पुष्पा गैसेज करती है, जबकि सिलेंडर की सप्लाई इलाहाबाद की फर्म इंपीरियल गैस करती है।
इसके पूर्व मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई गोरखपुर की गैस सप्लायर कंपनी मोदी गैसेज करती थी। बताया जा रहा है कि बिना किसी टेंडर के इलाहाबाद की फर्म को ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लाई का ऑर्डर दे दिया गया।
हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से इसे ट्रायल बताया जाता रहा है। मोदी गैस जहां 233.33 रुपये प्रति सिलेंडर (7 क्यूबिक मीटर) की दर से ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई करता था, वहीं इलाहाबाद इंपीरियल गैस की ओर से मेडिकल कॉलेज को 235 रुपये की दर से सिलेंडर की आपूर्ति कर रहा है। बेहोशी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली गैस नाइट्रस ऑक्साइड की सप्लाई भी अधिक दर पर हो रही है। मोदी गैस की दर जहां 5000 रुपये प्रति सिलेंडर (17 क्यूबिक मीटर) है, वहीं इंपीरियल गैस 5150 रुपये की दर से सिलेंडर की सप्लाई कर रही है।
जब लिक्विड ऑक्सीजन खत्म हो जाए तो बीआरडी मेडिकल कॉलेज जैसी संस्था को हरेक घंटे 30 से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता होती है। ऐसे में जल्द से जल्द सिलेंडर की आपूर्ति के लिए स्थानीय फैक्टरी का होना काफी महत्वपूर्ण है। प्रवीण मोदी ने बताया कि 32 मिनट में 24 सिलेंडर भरा जा सकता है।
ऑक्सीजन सिलेंडर की लोकल आपूर्ति बनी जीवनदायिनी, मोदी गैसेज ने पहुंचवाया 215 ऑक्सीजन सिलेंडर
लिक्विड ऑक्सीजन के खत्म होने के बाद मेडिकल कॉलेज की सारी निर्भरता ऑक्सीजन सिलेंडर पर हो जाती है, लेकिन बीआरडी मेडिकल कॉलेज ने जिस फर्म से ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई का करार किया है, उसे आकस्मिक स्थिति में मेडिकल कॉलेज तक ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाने में कम से कम तीन घंटे लग जाते हैं।
ऐसे में शुक्रवार को लिक्विड ऑक्सीजन के खत्म हो जाने के बाद स्थानीय फैक्ट्री मोदी गैसेज की ओर से तत्काल 200 से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती सैकड़ों मरीजों की जान बचा ली।
मोदी केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रोपराइटर प्रवीण मोदी ने बताया कि शुक्रवार को जब मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन के खत्म होने की सूचना के बाद कमिश्नर अनिल कुमार का फोन आया।
इसके बाद तत्काल 30 सिलेंडर मेडिकल कॉलेज में भिजवाया गया। वहीं इसके बाद लगातार ऑक्सीजन सिलेंडर भेजा जा रहा है। देर शाम तक करीब 215 ऑक्सीजन सिलेंडर भेजा जा चुका था। सिलेंडर वापस आने के बाद फीलिंग कर फिर भेजा जा रहा है।
मोदी ने कहा कि यह सब उन्होंने मानवता की वजह से किया है। मेडिकल कॉलेज की ओर से इस संबंध में कोई डिमांड भी नहीं की गई है।