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विदेशों से मदद: जर्मनी ने भेजे 120 वेंटिलेटर, स्पूतनिक वी की पहली खेप आई भारत

Sun, 02 May 2021 12:38 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  •  अभी जर्मनी भारत को और भी मदद भेजेगा इसमें एक मोबाइल ऑक्सीजन प्लांट भी है
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जर्मनी ने भारत को भेजी मदद... - फोटो : ani
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विस्तार
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देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर से स्थिति गंभीर बनी हुई है। कोरोना की बेकाबू होती दूसरी लहर से लड़ने के लिए दुनिया के देश भारत की मदद कर रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट कर जर्मनी द्वारा भेजे गए 120 वेंटिलेटर की जानकारी दी।

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उन्होंने ट्वीट कर कहा कि इस वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए हम हमारे भरोसेमंद साथी और मित्र जर्मनी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और 120 वेंटिलेटर के उपहार के लिए जर्मनी का आभारी हूं।

सूत्रों के मुताबिक जर्मनी अगले हफ्ते एक मोबाइल ऑक्सीजन प्लांट भी भेजेगा साथ ही 13 जर्मन तकनीकी कर्मचारी भारत आए हैं जो प्लांट को लगाने में मदद कर रहे हैं और भारतीय तकनीकी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके साथ ही रेमडेसिविर और मोनोक्लोनल की एक खेप आना बाकी है।
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अमेरिका से आया तीसरा शिपमेंट
विदेश मंत्रालय ने ट्वीट कर बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका से भारत में 1000 से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर, नियामकों और अन्य चिकित्सा उपकरणों को आए हैं। दो दिनों में तीसरा शिपमेंट है जो ऑक्सीजन की कमी पूरा करने में मदद करेगा। 
 


उज्बेकिस्तान से आई मदद
भारत की मदद के लिए उज्बेकिस्तान से एक उड़ान, ऑक्सीजन सांद्रता और अन्य चिकित्सा आपूर्ति दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंची है।

 

स्पूतनिक वी की पहली खेप आई, 1.5 लाख खुराक मिली
रूसी टीका स्पुनतिक वी की पहली खेप शनिवार को भारत आ गई। इसे लेकर आए एक विमान हैदराबाद उतरा। देश में टीकों की कमी को देखते हुए भारत सरकार ने इसे मंजूरी दी थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार पहली खेप में डेढ़ लाख खुराक भारत पहुंची है। वहीं, इसके बाद मध्य मई या माह के अंत तक 30 लाख खुराक और आएंगी। जून में 50 लाख खुराक और आएंगी।

भारतीय वायुसेना ने सिंगापुर से एयरलिफ्ट किए 3 ऑक्सीजन कंटेनर
भारतीय वायुसेना ने शनिवार को सिंगापुर से तीन क्रायोजेनिक ऑक्सीजन कंटेनर एयरलिफ्ट कर पश्चिमी बंगाल में पानागढ़ एयरबेस पर पहुंचाए।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने सिंगापुर के समकक्ष विवियन बालाकृष्णन से फोन पर बात करते हुए ऑक्सीजन से जुड़े उपकरणों की सप्लाई की मांग की थी। इसके बाद सिंगापुर ने ये तीन कंटेनर उपलब्ध कराए थे।

वायुसेना की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि एक आईएल-76 मालवाहक विमान ने सिंगापुर से खाली क्रायोजेनिक ऑक्सीजन कंटेनर एयरलिफ्ट कर पानागढ़ पहुंचाए। इसके अलावा भी भारतीय वायुसेना देश के अंदर ऑक्सीजन कंटेनरों को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचा रही है।

वायुसेना के मुताबिक, सी-17 विमानों ने दो खाली कंटेनर जोधपुर से जामनगर, दो कंटेनर भोपाल से रांची, दो कंटेनर ग्वालियर से रांची, दो कंटेनर चंडीगढ़ से रांची, दो कंटेनर विजयवाड़ा से भुवनेश्वर और दो कंटेनर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से रांची तक पहुंचाए। इसके अलावा देर रात तक हैदराबाद से भुवनेश्वर तक 9 खाली क्रायोजेनिक ऑक्सीजन कंटेनर और 4 कंटेनर हिंडन व लखनऊ से रांची पहुंचाने का काम चल रहा था।

भारत की मदद के लिए कई देशों और कंपनियों ने बढ़ाया अपना उत्पादन

कई देशों और अग्रणी ग्लोबल कंपनियों ने भारत की मदद करने के लिए अपने उत्पादन में बढ़ोतरी कर दी है और आपातकालीन सहायता पहुंचाना शुरू कर दिया है। भारत इस समय कोरोना वायरस महामारी की भयानक दूसरी लहर से जूझ रहा है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने प्रशासन से भारत को सभी तरह की सहायता पहुंचाने का निर्देश दिया है। साथ ही वॉशिंगटन का इस संकट की घड़ी में नई दिल्ली के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का आश्वासन भी दिया है।

बाइडन प्रशासन भारत को 10 करोड़ डॉलर से ज्यादा की सप्लाई पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें भारत के लिए सबसे अहम बन गई मेडिकल ऑक्सीजन और उससे जुड़े उपकरण, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के लिए पीपीई व अन्य सहयोग, टेस्टिंग व टीका उत्पादन सप्लाई, चिकित्सकीय व जन स्वास्थ्य सहायता सामग्री शामिल है।

यूएसएड सहायता सामग्री से लदे दो विमान शुक्रवार को भारत पहुंच चुके हैं, जबकि एक अन्य विमान ने ऑक्सीजन सिलिंडर, एन95 मास्क और टीका उत्पादन में काम आने वाले फिल्टर लेकर डलास एयरपोर्ट से शनिवार को नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी। 

सिंगापुर ने भी शनिवार को भारत के लिए तीन क्रायोजेनिक तरल ऑक्सीजन टैंक रवाना किए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने सिंगापुर के समकक्ष विवियन बालाकृष्णन से फोन पर बात करते हुए ऑक्सीजन से जुड़े उपकरणों की सप्लाई की मांग की थी। 

भारत में चीन के राजदूत सुन वीडांग ने भी शनिवार को कहा कि चीन ने भारत की तरफ से ऑर्डर किए गए 40000 से ज्यादा ऑक्सीजन जनरेटरों की सप्लाई के लिए अपने उत्पादन को तेज कर दिया है।

उन्होंने कहा, पिछले दो सप्ताह में दोनों देशों के बीच 61 मालवाहक विमान सेवाएं संचालित की जा चुकी हैं। सुन ने ट्वीट में कहा, मेरी जानकारी के हिसाब से चीन से भारत के लिए हवाई ढुलाई मार्ग सामान्य तरीके से संचालित हो रहा है।

सुन का यह बयान उन मीडिया रिपोर्ट के बीच में आया है, जिसमें कुछ अमेरिकी कंपनियों को चीन से भारत के लिए चिकित्सा सामग्री भेजने में समस्याएं झेलने की जानकारी दी गई थी। सुन ने एक अन्य ट्वीट में कहा, हम चीन के शहरों से भारत के लिए चिकित्सा सप्लाई भेजने में कस्टम मंजूरी में मदद कर रहे हैं।

बीजिंग में भारतीय दूतावास ने शनिवार को ट्वीट किया कि तियानजिन से एक विमान ने 12 आईएसओ कंटेनर लेकर उड़ान भरी है। ये कंटेनर एक भारतीय कंपनी ने तरल मेडिकल ऑक्सीजन की ढुलाई के लिए व्यवसायिक तौर पर खरीदे हैं। 

ग्लोबल कंपनियों में से भी अमेरिकी रिटेल दिग्गज वॉलमार्ट ने भारत को 20 ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट और 20 क्रायोजेनिक कंटेनर देने की घोषणा की है। साथ ही कोरोना वायरस से संघर्ष में सरकार की मदद कर रहे गैर सरकारी संगठनों को भी वॉलमार्ट 20 लाख डॉलर की मदद देगा।

इससे पहले अग्रणी विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने शुक्रवार को भारत को 100 लाख डॉलर की आपातकालीन राहत सहायता देने की घोषणा की थी। ग्लोबल पेमेंट कंपनी मास्टरकार्ड ने भारत में 2000 पोर्टेबल बेड उपलब्ध कराने के लिए न्यूयॉर्क के एक  गैरलाभकारी संगठन अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन को 89 लाख डॉलर की मदद दी है।
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बेल्जियम से आई मदद

रेमेडेसिविर की 9000 शीशियों की खेप बेल्जियम से भारत पहुंची है। इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय ने ट्वीट कर दी है।

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