भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। जर्मनी के राजदूत फिलिप अकरमैन ने नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात कर रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन को प्राथमिकता देने पर चर्चा की। यह बातचीत दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को और गहराई देने की कोशिश मानी जा रही है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में भारत और जर्मनी के बीच सुरक्षा और रक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार किया गया। खास तौर पर रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन के क्षेत्रों को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। जर्मन राजदूत ने नए साल की शुभकामनाएं भी जर्मनी की ओर से रक्षा सचिव को दीं।
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भारत-जर्मनी रक्षा रिश्तों की पृष्ठभूमि
भारत और जर्मनी के बीच लंबे समय से मजबूत रिश्ते रहे हैं। दोनों देशों के संबंध साझा मूल्यों और समान लक्ष्यों पर आधारित हैं। नवंबर 2025 में भी रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने जर्मनी के रक्षा मंत्रालय के स्टेट सेक्रेटरी जेन्स प्लॉटनर के साथ भारत-जर्मनी उच्च रक्षा समिति की बैठक की सह-अध्यक्षता की थी। उस बैठक में भी रक्षा और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
रणनीतिक साझेदारी के 25 साल
इस साल भारत और जर्मनी अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, समय के साथ दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग का महत्व कई गुना बढ़ा है। यह आपसी भरोसे को दर्शाता है, जो दशकों में मजबूत हुआ है। रक्षा क्षेत्र में सहयोग को भविष्य के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन से भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। वहीं जर्मनी के साथ तकनीकी सहयोग से दोनों देशों को रणनीतिक लाभ होगा। यह बैठक आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र में ठोस साझेदारी का आधार बन सकती है।
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