भारत की मेजबानी में 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले पश्चिम के भू-राजनीतिक गलियारों में यह बहस तेज हो रही है कि क्या इस समूह का उद्देश्य पश्चिमी वित्तीय व्यवस्था को चुनौती देना है। एक तरफ ब्रिक्स के विस्तार ने इसे वैश्विक दक्षिण की बड़ी आवाज बनाया है, वहीं पश्चिम में ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि यह संगठन किसी नए शीत युद्ध के अखाड़े में तब्दील न हो जाए। ऐसे में भारत की असल चुनौती ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी धड़े वाली छवि से बचाने की होगी।
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विकास का एजेंडा
राजधानी दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत मंडपम में किया जाएगा जिसकी थीम है-लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण।
ब्रिक्स देशों में कितने नाम?
ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा ब्रिक्स देशों में साल 2024 में पांच और देश- मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जुड़े। 2025 में इंडोनेशिया को भी इस समूह से जोड़ा गया। ऐसे में 11 देशों के इस समूह के प्रतिनिधि भारत की राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे।