चुनाव की सरगर्मियां बढ़ने के साथ ही देश की पुरानी पार्टी कांग्रेस ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। प्रियंका की सियासी पारी की शुरुआत के बाद से ही पार्टी लगातार फ्रंट फुट पर खेल रही है। चुनाव की उल्टी गिनती के बीच बीते कुछ समय में मुख्य विपक्षी दल ने कई महत्वपूर्ण वादे किए है। एक-एक करके पार्टी अपने चुनावी घोषणापत्र के वादों को जनता के बीच लाकर अपने मतदाताओं को साधने का प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी विभिन्न मंचों का इस्तेमाल मोदी सरकार की नाकामियां गिनाने के साथ-साथ बड़े वादे करने के लिए भी किया है।
देश की राजनीति पर इन वादों का असर
बीते कुछ दिनों में कांग्रेस पार्टी ने अलग-अलग मंचों से ऐसे वादे किए हैं जो देश की राजनीति पर बड़ा असर डालते हैं। इन वादों के जरिए कांग्रेस गरीब, मुस्लिम और आदिवासी मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर रही है। इन तीन वर्गों से लगभग 60 से 65 फीसदी मतदाता आते हैं। इनका प्रभाव लगभग 450 लोकसभा सीटों पर है। आकड़े बताते है कि पिछले लोकसभा चुनाव में 10 मुस्लिमों में से एक का वोट भाजपा को मिला था। 2018 के रुझानों में 100 में 10 मुस्लिम मतदाताओं का रुझान भाजपा की ओर है। जिनमें 75 फीसदी महिलाएं शामिल है। 2014 के आम चुनाव में राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक में 15 फीसदी मतदाताओं ने अपना वोट भाजपा को दिया था।
28 जनवरी, छत्तीसगढ़: बेसिक इनकम का वादा
राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में किसान सम्मलेन को संबोधित करते हुए कहा कि अगर वह चुनाव जीतकर सत्ता में आए तो देश के प्रत्येक गरीब को एक न्यूनतम राशि सीधे उनके खाते में देंगे। देश में लगभग 60 करोड़ गरीब और किसान मतदाता हैं, ऐसे में कांग्रेस इस वादें को गेमचेंजर मान रही है।