उत्तर प्रदेश में सीटों की संख्या और मत प्रतिशत के हिसाब से भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ है, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान बसपा का हुआ है। उसकी न केवल सीटें कम हो गईं, बल्कि उसका आधार वोट बैंक भी खिसककर दूसरे दलों की ओर चला गया। राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि मल्लिकार्जुन खड़गे के कारण दलित समाज कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के साथ खड़ा हो गया। इससे यूपी के साथ साथ पंजाब और कर्नाटक तक इंडिया गठबंधन को लाभ मिला। इसने कांग्रेस को जबरदस्त वापसी करने का मौका मिला है।
राहुल गांधी अपनी सभाओं में लगातार संविधान की प्रति लहराते हुए यह बात कहते थे कि भाजपा जीतने के बाद संविधान बदल देगी। माना जा रहा है कि इससे दलित समुदाय के मतदाताओं में यह बात फैल गई कि उनके दलित आइकॉन बाबा साहब अम्बेडकर के बनाये हुए संविधान को बदल सकती है। भाजपा नेताओं ने बार-बार इस गलतफहमी को दूर करने की कोशिश की, लेकिन दलितों के बीच इस गलतफहमी को वह दूर नहीं कर पाई और उसे इसका नुकसान उठाना पड़ा। जबकि कांग्रेस को इसका जबरदस्त लाभ हुआ। इसे राहुल गांधी और कांग्रेस के मजबूत दांव की तरह से देखा जा रहा है।
कांग्रेस के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि समाजवादी पार्टी के साथ हुए गठबंधन में पार्टी को ज्यादा सीटों पर समझौता करना चाहिए था। यदि ऐसा होता तो आज उत्तर प्रदेश में पार्टी की स्थिति ज्यादा मजबूत होती। इससे पार्टी आगामी चुनावों के लिए प्रदेश में तैयार हो जाती। इस समय पार्टी को मिली जीत ने भी पार्टी को दुबारा वापसी करने में मदद किया है। जिस समय पार्टी को प्रदेश से खत्म समझ लिया गया था, पार्टी की यह जोरदार वापसी उसे दुबारा खड़ी होने में मदद करेगी।