सार
एक नए शोध में पाया गया है कि पीएफएएस (फॉरएवर केमिकल्स) मानव जीन की गतिविधियों को बदल सकते हैं, जिससे कैंसर, अल्जाइमर और ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना द्वारा 303 दमकलकर्मियों पर किए गए अध्ययन में माइक्रो आरएनए अणुओं में गंभीर बदलाव पाए गए, जो इन बीमारियों से जुड़े हैं।
मानव जीवन को आसान बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कई रसायन अब सेहत के लिए गंभीर खतरा साबित हो रहे हैं। एक ताजा शोध में खुलासा हुआ है कि फॉरएवर केमिकल्स यानी पीएफएएस (पर-एंड पॉली फ्लुओरो एल्काइल सब्स्टेंसेस) हमारे जीन की गतिविधियों में ऐसे बदलाव ला सकते हैं जो कैंसर, अल्जाइमर, ऑटोइम्यून बीमारियों और संक्रमणों का खतरा बढ़ा देते हैं।
यह अध्ययन अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना की वैज्ञानिक मेलिसा फर्लांग के नेतृत्व में किया गया है। इसके नतीजे अंतरराष्ट्रीय जर्नल एनवायरनमेंटल रिसर्च में प्रकाशित हुए हैं। यह रिसर्च शुरुआती प्रयासों में से एक है, जिसमें पीएफएएस को माइक्रो आरएनए में होने वाले बदलाव से जोड़ा गया है।
माइक्रो आरएनए बेहद सूक्ष्म अणु होते हैं जो जीन की गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। अध्ययन के अनुसार इन अणुओं में बदलाव कई गंभीर बीमारियों से जुड़ा पाया गया है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका के 303 दमकलकर्मियों के रक्त नमूनों की जांच की। इसमें नौ प्रमुख प्रकार के फॉरएवर केमिकल्स और उनसे संबंधित माइक्रो आरएनए की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया।
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इन गंभीर बीमारियों का खतरा
- कैंसर: ब्लड कैंसर (ल्यूकीमिया), ब्लैडर, लिवर, थायरॉयड और ब्रेस्ट कैंसर से संबंध पाया गया।
- न्यूरोलॉजिकल रोग: अल्जाइमर जैसी मस्तिष्क संबंधी बीमारियों से जुड़ाव सामने आया।
- ऑटोइम्यून और संक्रमण: ल्यूपस, अस्थमा और टीबी जैसी बीमारियों से भी संबंध देखा गया।उदाहरण के तौर पर, पीएफओएस (परफ्लुओरो आक्टेन) नामक एक आम फॉरएवर केमिकल को कैंसर से जुड़े माइक्रो आरएनए के कम स्तर से जोड़ा गया है।
फॉरएवर केमिकल्स क्या हैं
पीएफएएस करीब 12,000 रासायनिक यौगिकों का समूह है। इनका इस्तेमाल पानी, तेल और दाग-धब्बों से बचाने वाले उत्पादों में किया जाता है।वॉटरप्रूफ कपड़े,नॉन-स्टिक कुकवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स,क्लीनिंग प्रोडक्ट्स, दमकलकर्मियों के फोम और सुरक्षा गियर में इनका इस्तेमाल होता है। ये रसायन पर्यावरण में बेहद धीमी गति से टूटते हैं और लंबे समय तक बने रहते हैं। इसी कारण इन्हें फॉरएवर केमिकल्स कहा जाता है।
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चौंकाने वाले हैं निष्कर्ष
अध्ययन की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. मेलिसा फर्लॉंग का कहना है कि पीएफएएस जिस व्यापक स्तर पर जीन और जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं, वह चौंकाने वाला है। इससे स्पष्ट होता है कि ये रसायन गंभीर बीमारियों के जोखिम को काफी बढ़ा सकते हैं।