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सरकारी अस्पतालों में लिंग परिवर्तन के मामले बढ़े

Thu, 18 Jan 2018 01:45 AM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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WEF gender gap report
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रवि (काल्पनिक नाम) उम्र 25 वर्ष, बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष का छात्र। यूं तो रवि लड़का है, लेकिन वह स्वयं को लड़की समझता है। उसकी बोलचाल, हावभाव और चाल लड़की जैसी है। अब वह पूरी तरह से लड़की बनना चाहता है। बुधवार को अस्पताल आए रवि ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि समाज में लड़का-लड़की कुछ नहीं होता। जरूरी है बस अपने अधिकार को पाना। हालांकि रवि के परिवार का कुछ और ही मानना है, लेकिन बेटे की जिद के आगे वे दिल्ली आने को तैयार हुए। यहां दिल्ली गेट स्थित एलएनजेपी में डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद रवि का इलाज शुरू हो चुका है।
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ये कहानी सिर्फ रवि की नहीं, बल्कि ऐसे कई लोगों की है। जो सेक्स चेंज (लिंग परिवर्तन) कराने के लिए सरकारी अस्पताल पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों से दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में लिंग परिवर्तन के मामले बढ़े हैं। स्थिति यह है कि अब अस्पतालों में ऐसे मरीजों की वेटिंग लंबी है। जिस पर नजर डालें तो सर्वाधिक लड़कों की तादाद नजर आती है, जो स्वयं को लड़की मानते हैं। 

पिछले वर्ष दिल्ली के सरकारी अस्पताल एलएनजेपी में ऐसे मरीजों की संख्या पांच थी। अभी साल 2018 की शुरुआत है और सात नए मरीज अपना पंजीयन करवा चुके हैं। इनमें से एक बिट्स पिलानी का इंजीनियर है तो दूसरा एम्स का एक डॉक्टर। तीन मरीज महिलाएं हैं, जिन्हें पुरुष बनना है।
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‘हार्मोन के इंजेक्शन पर जीना पड़ता है पूरी जिंदगी’

सफदरजंग अस्पताल
एलएनजेपी के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. पीएस भंडारी ने बताया कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करना वे कतई नहीं चाहते। जब उनके पास कोई लिंग परिवर्तन कराने आता है, तो वह उसे पूरी जानकारी देते हैं। सेक्स चेंज लोगों को आसान लगता है, लेकिन वास्तविक जीवन में ऐसा नहीं है। लिंग परिवर्तन कराने के बाद जहां जिंदगी भर हार्मोन के इंजेक्शन पर जीना पड़ता है, वहीं प्रजनन नहीं कर सकते हैं।

दिल्ली के अस्पतालों में सुविधाएं अच्छी

यूपी के कानपुर जिले से लिंग परिवर्तन कराने दिल्ली आए विवेक शर्मा (बदला हुआ नाम) बताते हैं कि दिल्ली के अस्पतालों में सुविधाएं ज्यादा हैं। यहां इलाज का करीब 80 फीसदी खर्च निशुल्क रहता है। कुछ ही दवा या सर्जरी का सामान बाहर से लाना पड़ता है। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि सफदरजंग, आरएमएल, एलएनजेपी प्लास्टिक सर्जरी के बड़े केंद्र हैं, इसलिए यहां कई राज्यों से मरीज पहुंचते हैं।

नवंबर तक कोई दिन खाली नहीं

एक सवाल पर डॉ. पीएस भंडारी ने बताया कि इस वक्त उनके पास सात लोगों की वेटिंग चल रही है। चूंकि लिंग परिवर्तन दो से तीन चरणों में होता है, इसलिए एक मरीज में करीब तीन महीने तक का समय लगता है। ऐसे में उनके पास इस साल नवंबर से पहले कोई भी दिन खाली नहीं है।

‘भगवान ने बनाया है ऐसा’

अब भगवान ने मुझे लड़की जैसा बनाया है तो यही सही। मैं लड़की बनना चाहता हूं, इसलिए लिंग परिवर्तन करवा रहा हूं। मेरे फैसले में परिवार भी साथ खड़ा है। ये कहना है एम्स के एक डॉक्टर का। डॉक्टर ने बताया कि उसके परिवार में दो भाई और हैं, लेकिन वह बचपन से ही उनसे बहुत अलग महसूस करता है। एक वक्त था जब वह खुद को ज्यादातर समय कमरे में बंद रखता था, लेकिन अब वह डॉक्टर बन गया है और उसे किसी से अब कोई डर नहीं।
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