गुजरात के वडोदरा में 30 साल की नीलम (बदला हुआ नाम) सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी (एसआरएस) करवाना चाहती है। इसके लिए वह अहमदाबाद की एक साइकेट्रिस्ट के पास पिछले साल से जा रही है। उन्होंने कहा, 'मैं अपने घर की इकलौती संतान हूं। बचपन से मैं लड़कों की तरह कपड़े पहनती रही हूं। जब मैं नए शहर आई तो मुझे हाल ही में अपनी पार्टनर मिली और मैंने सर्जरी करवाने का फैसला लिया। मैंने अपने माता-पिता को अपने निर्णय के बारे में बताया लेकिन वह मुझे एक मर्द के तौर पर देखने को राजी नहीं हैं।'
अरुणा अकेली ऐसी शख्स नहीं हैं। अहमदाबाद के मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि पांच साल पहले उनके पास सालाना लिंग परिवर्तन करवाने के लिए केवल पांच मामले आया करते थे। अब यह संख्या 10 हो गई है। अहमदाबाद के डॉक्टर पीके बिलवानी जोकि प्लास्टिक सर्जन हैं। वह 1977 से अभी तक 47 लिंग परिवर्तन सर्जरी करवा चुके हैं। फिलहाल उनके पास पांच मामले हैं। उन्होंने कहा, 'पिछले पांच सालों में एसआरएस करवाने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है।'
बिलवानी के साथी हैं डॉक्टर अमृत बोडानी जो कि पेशे से साइकेट्रिस्ट हैं। उन्होंने बताया कि वह इस साल 10 मरीजों को एसआरएस पर सलाह दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि जेंडर डाइफोरिया मुख्य कारण है जिसकी वजह से लोग एसआरएस करवा रहे हैं। डॉक्टर बोडानी ने कहा, 'एक शख्स जब अपने शरीर में खुद को जकड़ा हुआ और जन्म के अपने लिंग को स्वीकार नहीं कर पाता है तो वह एक भयानक तनाव से गुजरता है। दिलचस्प बात यह है कि 80 प्रतिशत मामलों में महिलाएं पुरुष बनना चाहती हैं। यह हमारी पितृसत्तात्मक समाज को दर्शाती है।'
सोशल मीडिया के विभिन्न समूह ट्रांसेक्शुअलस को अपना समर्थन दे रहे हैं। वडोदरा की सीमा (बदला हुआ नाम) ने 2015 में एसआरएस करवाया था। उन्हें लोग संपर्क कर रहे हैं ताकि इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जाना जा सके। सीमा ने कहा, 'मेरे सफल ऑपरेशन के बाद, जितना मुझे पता है वडोदरा के पांच और लोगों ने इस तरह की सर्जरी करवाई।'