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Gehlot vs Pilot: गहलोत-पायलट जंग से फिर मुश्किल में आलाकमान, जानें CM पद के घमासान से लेकर अब तक क्या-क्या हुआ

Mon, 10 Apr 2023 04:12 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री गहलोत पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा- गहलोत वसुंधरा राजे सरकार में हुए घोटालों और भ्रष्टाचार की जांच नहीं करा रहे हैं। इसके विरोध में पायलट ने एक दिन के धरने का भी एलान किया है।
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अशोक गहलोत और सचिन पायलट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। इससे पहले राज्य में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सत्ताधारी कांग्रेस में फिर से पायलट बनाम गहलोत की लड़ाई शुरू हो गई है। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट अपनी ही पार्टी की सरकार पर हमलावर हैं। रविवार को पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा- गहलोत वसुंधरा राजे सरकार में हुए घोटालों और भ्रष्टाचार की जांच नहीं करा रहे हैं। इसके विरोध में पायलट ने एक दिन के धरने का भी एलान किया है।  
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ये पहली बार नहीं है जब सचिन पायलट और अशोक गहलोत की लड़ाई सुर्खियों में आई है। 2018 से अब तक कई मौकों पर दोनों आमने-सामने हुए हैं। आइये जानते हैं राजस्थान में कब-कब आमने-सामने हुए गहलोत और पायलट? कैसे इन विवादों का पटाक्षेप हुआ?

अशोक गहलोत, राहुल गांधी, सचिन पायलट - फोटो : SOCIAL MEDIA
2018 के चुनाव में जीत के साथ ही शुरू हुई खींचतान 
राजस्थान विधानसभा के लिए चुनाव सात दिसंबर 2018 को हुए थे जबकि परिणाम 11 दिसंबर को घोषित हुए। अलवर की रामगढ़ सीट छोड़कर बाकी 199 सीटों पर मतदान हुआ। रामगढ़ सीट पर बसपा के प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह के निधन के कारण चुनाव स्थगित हो गया था। कांग्रेस नेबहुमत से दो कम 99 सीटें जीतीं। सूबे में भाजपा को 73 सीटें ही मिल सकीं। छह सीटें मायावती की पार्टी बसपा तो बाकी 20 अन्य की झोली में गईं। 

चुनाव के बाद कांग्रेस के सामने मुख्यमंत्री बनाने का सवाल खड़ा हो गया। एक ओर युवा चेहरे और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट थे, तो दूसरी ओर दो सरकार चला चुके वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत। यहीं से दोनों में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए जबस्दस्त खींचतान शुरू हो गई। इस स्थिति से निपटने के लिए तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच गहन चर्चा हुई। इसके बाद अनुभवी अशोक गहलोत के हाथों में राज्य की सत्ता सौंपने का फैसला हुआ। इसी दौरान राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री पद के दावेदार दोनों नेताओं की खुद के साथ एक तस्वीर ट्वीट की। इस फोटो को उन्होंने कैप्शन दिया, 'यूनाइटेड कलर्स ऑफ राजस्थान।' वहीं बसपा और निर्दलीय विधायकों ने सरकार बनाने के लिए अपना समर्थन दे दिया। इसके बाद अशोक गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। पायलट के डिप्टी सीएम के पद से  संतोष करना पड़ा।

अशोक गहलोत और सचिन पायलट - फोटो : पीटीआई
2020: पायलट गुट की बगावत से संकट में आई सरकार
दिसंबर 2018 में सरकार बनने के 19 महीने बाद पहली बार पायलट और गहलोत एक दूसरे के आमने-सामने आए। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब जुलाई 2020 में कांग्रेस के 19 विधायक विभिन्न मुद्दों पर विवाद के बाद दिल्ली आ गए। 

स्थिति बिगड़ी तो आलाकमान ने मामले में दखल दिया। इसके बाद वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, अजय माकन और अविनाश पांडे, अशोक गहलोत से मिलने जयपुर पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री आवास पर बैठक की। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अन्य नेताओं के साथ कांग्रेस विधायकों ने विश्वास प्रस्ताव के लिए एक बैठक की। सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों को भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।
 14 जुलाई को पायलट और को राजस्थान के उपमुख्यमंत्री और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। सचिन पायलट का समर्थन करने वाले कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह और रमेश चंद मीणा से भी उनके मंत्रालय छीन लिए गए। यहां तक कि पायलट को विधानसभा से उनकी सदस्यता भंग करने के बारे में राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष, सी. पी. जोशी ने नोटिस भेज दिया। 

इस बीच दोनों में तकरार इतनी बढ़ चुकी थी कि गहलोत ने पायलट के लिए 'निकम्मा' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। गहलोत ने एक बयान में कहा था है, 'हम जानते थे कि वो (पायलट) निकम्मा है, नकारा है, कुछ काम नहीं कर रहा है, खाली लोगों को लड़वा रहा।' इस वक्त ऐसा लग रहा था कि अब पायलट कांग्रेस का अतीत हो चुके हैं। वहीं पायलट के पास इतनी संख्या में विधायक भी नहीं थे कि वो उस तरह की स्थितियां पैदा कर सकें जैसी चार महीने पहले मध्य प्रदेश में हुईं थीं। लिहाजा धीरे-धीरे ही सही उनके तेवर नरम पड़ गए।

प्रियंका गांधी, सचिन पायलट - फोटो : SOCIAL MEDIA
एक मुलाकात ने बदल दिए हालात 
10 अगस्त को, सियासी घटनाक्रम में बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब अचानक सचिन पायलट राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मिले। इसके बाद सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिले और आखिरकार, राजस्थान कांग्रेस के दोनों गुट फिर से एक हो गए। 14 अगस्त को, अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार ने राजस्थान विधान सभा में ध्वनि मत से विश्वास मत जीत लिया।

Ashok Gehlot vs Sachin Pilot - फोटो : अमर उजाला
2022: चुनाव से साल भर पहले गहलोत खेमे की ओर से हुई बड़ी बगावत 
पिछले साल सितंबर में राजस्थान कांग्रेस के दोनों धड़े फिर आमने-सामने आ गए। दरअसल, पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए गहलोत का नाम आगे था। शीर्ष नेतृत्व चुनाव से पहले पार्टी ने राज्य में नेतृत्व बदलना चाहता था। इसको लेकर होने वाली विधायकों की बैठक से ऐन पहले, गहलोत समर्थक विधायकों ने बगावत कर दी। इन विधायकों ने अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाने के विरोध में इस्तीफा देने की धमकी दी। 25 सितंबर की रात गहलोत गुट के 82 विधायक अचानक विधानसभा अध्यक्ष सी. पी. जोशी से मिले और अपना इस्तीफा दे दिया। हालांकि, स्पीकर ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। 

उधर, संकट बढ़ता देख देर रात ही तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अजय माकन और मल्लिकार्जुन खरगे को दिल्ली वापस बुला लिया। साथ ही एआईसीसी के सदस्यों ने सोनिया गांधी से अशोक गहलोत को पार्टी अध्यक्ष की दौड़ से बाहर करने का अनुरोध किया। 26 सितंबर को सोनिया गांधी के आवास पर राज्य की स्थिति पर चर्चा के लिए एक बैठक हुई। सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को विधायकों से बातचीत के लिए जयपुर भेजा गया। 29 सितंबर को सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ने और राजस्थान के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का फैसला लिया। इसके बाद पायलट ने बैठक का बहिष्कार करने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

सीएम अशोक गहलोत और पीएम मोदी - फोटो : सोशल मीडिया
जब पीएम की तारीफों से तनी भौहें 
पिछले साल नवंबर में दोनों नेताओं के बीच जारी मतभेद खुलकर सामने आए थे। इसकी वजह थी बांसवाड़ा में पीएम मोदी द्वारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए कहे गए तारीफ के शब्द। दरअसल, मानगढ़ की गौरव गाथा कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पीएम ने कहा था, 'जब मैं मुख्यमंत्री था और मुख्यमंत्रियों की मुलाकात होती थी, तब उसमें अशोक गहलोत सबसे सीनियर होते थे। आज भी मंच पर तीन मुख्यमंत्री बैठे हैं, जिनमें अशोक गहलोत सबसे सीनियर हैं। उनके जैसे मुख्यमंत्री का मंच पर मौजूद होना गौरव की बात है।'

बाद में पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने इन तारीफों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था, 'पीएम ने मुख्यमंत्री की प्रशंसा की और यह एक दिलचस्प घटनाक्रम है क्योंकि प्रधानमंत्री ने संसद में गुलाम नबी आजाद की ऐसी ही प्रशंसा की थी और हम सबने देखा है कि उसके बाद क्या हालात बने।' साथ ही पायलट ने आलाकमान से इसका संज्ञान लेने को कहा था।

वीरांगनाओं के मुद्दे पर सांसद मीणा कर रहे थे विरोध। - फोटो : अमर उजाला
वीरांगनाओं के साथ हुए दुर्व्यहार पर उठाए अपनी सरकार पर सवाल
पिछले महीने मार्च में राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था। पायलट ने सांसद किरोड़ी लाल मीणा और वीरांगनाओं के साथ हुए दुर्व्यहार को लेकर कहा था कि धरना प्रदर्शन करने का सबको संवैधानिक अधिकार है, लेकिन किसी भी तरह से जवानों और वीरांगनाओं को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। देश में ऐसा मैसेज नहीं जाना चाहिए कि हम विरांगनाओं की बात नहीं सुन सकते हैं। किसी भी व्यक्ति को अपना अहम सामने नहीं लाना चाहिए, उनकी छोटी-छोटी मांगें थीं, पूरी की जा सकती है। 

दरअसल, राज्य में कई दिनों तक पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों की विधवाएं धरने पर बैठी थीं। इसी दौरान आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने विधवाओं को घसीटकर बाहर कर दिया, जब वे अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलने की कोशिश कर रही थीं।
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सचिन पायलट बनाम अशोक गहलोत - फोटो : Self
अब भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तकरार
अब राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट एक बार फिर मुख्यमंत्री गहलोत के विरोध में उतर आए हैं। रविवार को पायलट ने गहलोत पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा- गहलोत वसुंधरा राजे सरकार में हुए घोटालों और भ्रष्टाचार की जांच नहीं करा रहे हैं। इसके विरोध में पायलट ने एक दिन के धरने का भी एलान किया है।
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