प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि बैंक खाता, मोबाइल नंबर और आधार की त्रिमूर्ति के कारण सब्सिडी को जरूरतमंद तक सीधे पहुंचाने में मदद मिली है और इस प्रक्रिया में सरकार को 65 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है। यह रकम प्रणाली में लीकेज के कारण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती थी। वे बृहस्पतिवार को यहां साइबर स्पेस पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
मोदी ने कहा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी के कारण सुविधाओं में काफी इजाफा हुआ है। किसान को घर बैठे विशेषज्ञों की राय और फसलों की अच्छी कीमत मिल रही है। छोटो उद्यमियों को सरकार को माल सप्लाई करने की सहूलियत मिली है।
पेंशनभोगियों के लिए अब खुद बैंक अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होने की जरूरत खत्म हो गई है और महिलाओं को रोजगार मिला है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारत के स्टार्ट अप उद्यमों में निवेश की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हम डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपने अनुभवों और उपलब्धियों को दुनिया भर के देशों के साथ साझा करना चाहेंगे।
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उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में साइबर स्पेस ने दुनिया को बदलकर रख दिया है और डिजिटल टेक्नोलॉजी लोगों को समर्थ बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। इसकी वजह से ही गरीब और कमजोर लोगों को भी संपन्न लोगों से मुकाबला करने का मौका मिला है। इसी तरह विकासशील देशों को भी विकसित देशों को चुनौती देने का अवसर प्राप्त हुआ है।
टेक्नोलॉजी सभी बाधाओं और दीवारों को गिरा रही है। टेक्नोलॉजी के जरिए बदलाव लाने वाले केंद्र सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम को दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी पहल करार देते हुए उन्होंने कहा कि इसकी वजह से शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक के क्षेत्र में सेवाओं की डिलीवरी और गवर्नेंस में सुधार हो रहा है।
साइबर हमले रोकने के लिए देशों के बीच साझा सूचना तंत्र जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल स्पेस आतंकवाद और कट्टरता के प्रचार-प्रसार का माध्यम बनता जा रहा है और इससे मुकाबला करने के लिए सभी देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और सूचनाओं का साझा तंत्र विकसित करने की जरूरत है।
इस क्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा और निजता के बीच संतुलन भी कायम करना होगा। हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि साइबर सुरक्षा युवाओं के लिए एक आकर्षक करियर विकल्प बन सके।