दिल्ली के सरकारी गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल ने नर्सिंग कर्मचारियों को मलयालम भाषा में बात करने से रोकने वाला आदेश चौतरफा आलोचना के बाद रविवार को वापस ले लिया और कहा कि मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी व शशि थरूर ने भी आपत्ति जताई थी।
अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. अनिल अग्रवाल ने एक नया आदेश जारी कर कहा, 'अस्पताल प्रशासन और दिल्ली सरकार की जानकारी या किसी भी निर्देश के बिना जी बी पंत अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक द्वारा जारी परिपत्र तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है।' डॉ. अग्रवाल ने कहा कि मामले की जांच चल रही है और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कोरोना के खिलाफ लड़ाई में डॉक्टर और नर्स किसी भगवान के रूप से कम नहीं। ये लोग दिन-रात एक कर लोगों की जिंदगियां बचा रहे हैं, लेकिन दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के विवादित सर्कुलर ने नर्सों के काम करने के तौर-तरीके पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था।
उल्लेखनीय है कि अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक ने शनिवार को एक परिपत्र जारी कर अपने नर्सिंग कर्मचारियों को काम के दौरान मलयालम भाषा में बात नहीं करने को कहा था, क्योंकि 'अधिकतर मरीज और सहकर्मी इस भाषा को नहीं जानते हैं,' जिसके कारण बहुत असुविधा होती है। इस सर्कुलर पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि मलयालम भी उतनी ही भारतीय भाषा है, जितनी कोई और भाषा है। भाषाओं के नाम पर भेदभाव बंद किया जाना चाहिए।
राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी इस मामले पर गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने ट्विटर के जरिए लिखा कि ये आश्चर्यजनक है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में एक सरकारी संस्थान अपनी नर्सो से कह सकता है कि वे उन लोगों से भी अपनी मातृभाषा में बात ना करें, जो उन्हें समझ सकते हैं। ये एकदम अस्वीकार्य है
दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में से एक गोविंद बल्लभ पंत स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (जीआईपीएमईआर) द्वारा जारी परिपत्र में नर्सों से कहा गया था कि वे संवाद के लिए केवल हिंदी और अंग्रेजी का उपयोग करें, अन्यथा 'कड़ी कार्रवाई' का सामना करने के लिए तैयार रहें।
जी बी पंत के नर्सिंग स्टाफ संगठन के एक अधिकारी ने कहा कि अस्पताल में करीब 850 नर्स काम कर रही हैं जिनमें से तकरीबन 400 केरल की मलयालम भाषी हैं। संगठन के अध्यक्ष लीलाधर रामचंदानी ने दावा किया कि अस्पताल में मलयालम भाषा का इस्तेमाल करने के संबंध में एक मरीज द्वारा स्वास्थ्य विभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी को भेजी शिकायत के आधार पर परिपत्र जारी किया गया, हालांकि संगठन परिपत्र में इस्तेमाल शब्दों पर आपत्ति व्यक्त करता है।