कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने गुरुवार को गाजा में जारी मानवीय संकट को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि गाजा में हर दिन दो अंकों में मौतें हो रही हैं और मरने वालों में बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है, जो इस संघर्ष से सीधे तौर पर जुड़े भी नहीं हैं। उन्होंने इसे पूरी मानवता के लिए शर्मनाक बताया है।
उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए चिदंबरम ने लिखा कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, मई से अब तक गाजा में 1000 से ज्यादा फलस्तीनी सिर्फ खाना पाने की कोशिश में मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि शरणार्थी शिविरों में भूख से तड़पते बच्चों की तस्वीरें यह साबित करने के लिए काफी हैं कि वे भूख और बीमारी से मर रहे हैं।
दुनिया की अंतरात्मा दफन हो चुकी है- चिदंबरम
चिदंबरम ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, "दुनिया सो रही है। और जब वह जागती भी है, तब भी उसकी अंतरात्मा कहीं दफन पड़ी होती है।" उन्होंने यह सवाल उठाया कि इतने भयानक हालात के बाद भी दुनिया गंभीर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही।
तत्काल युद्धविराम की मांग कर चुका है भारत
इससे पहले भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में गाजा संकट पर चिंता जताई थी। भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथानेनी हरीश ने कहा था कि केवल संघर्षविराम के छोटे-छोटे विराम मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने तुरंत, पूर्ण युद्धविराम, मानवीय सहायता और बंधकों की रिहाई की मांग की थी।
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गाजा के अस्पताल और स्कूल व्यवस्था पर असर
भारत की ओर से कहा गया कि गाजा में स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा प्रणाली पूरी तरह चरमरा चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अनुमान है कि गाजा के 95% अस्पताल या तो बर्बाद हो चुके हैं या बंद पड़े हैं। वहीं, 6.5 लाख से ज्यादा बच्चों को पिछले 20 महीनों से कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिल पाई है।
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गाजा में अब तक 58,000 से ज्यादा मौतें
अल जजीरा ने गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से बताया कि 7 अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में 58,386 लोगों की जान जा चुकी है और 1,39,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। वहीं, इजराइल में 7 अक्टूबर को हमास के हमले में 1,139 लोगों की मौत हुई थी और 200 से ज्यादा लोगों को बंदी बना लिया गया था।