गाजा पट्टी में इस्राइली हमलों में मंगलवार को कम से कम 40 फलस्तीनी मारे गए। इनमें 17 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल थे। यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वॉशिंगटन में दो दिनों में दूसरी बार मुलाकात की। बातचीत का मकसद अमेरिका समर्थित संघर्षविराम योजना को अंतिम रूप देना है, जिससे 21 महीने से चल रहे युद्ध को रोका जा सके।
गाजा के दक्षिणी शहर खान यूनुस के नासिर अस्पताल ने बताया कि मरने वालों में एक ही परिवार के 10 लोग शामिल थे, जिनमें तीन बच्चे भी थे। इस्राइली सेना ने इस हमले की पुष्टि नहीं की, लेकिन कहा कि उसने पिछले 24 घंटों में 100 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए। इनमें हथियारों के भंडार, सुरंगें, रॉकेट लॉन्चर और कथित हमास के लड़ाके शामिल हैं।
लोगों को नहीं मिल रहा पानी, गर्मी से हाल बेहाल
गाजा के तटीय क्षेत्र मुवासी में लोग तंबू में रह रहे हैं। वहां रहने वाली अबीर अल-नज्जार ने कहा कि वह अपने बच्चों के लिए पर्याप्त खाना और पानी नहीं जुटा पा रही हैं। उन्होंने कहा कि मैं दुआ करती हूं कि यह संघर्षविराम सिर्फ दिखावा न हो, बल्कि पूरी तरह युद्ध रुके। उनके पति अली अल-नज्जार ने बताया कि पानी का टैंकर चार दिन में एक बार आता है, जो गर्मी में पर्याप्त नहीं होता।
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जंग से तबाह लोग कर रहे अमन की अपील
एक अन्य महिला, अमानी अबू-ओमर ने बताया कि उनके बच्चों को डिहाइड्रेशन और गर्मी के कारण त्वचा की समस्याएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि हमने कई बार संघर्षविराम की उम्मीद की, लेकिन हर बार हमें निराशा ही मिली। लोगों ने ट्रकों का पीछा कर पानी भरने की कोशिश की।
युद्ध में अब तक 57,000 फलस्तीनियों की मौत
यह जंग 7 अक्टूबर 2023 को तब शुरू हुई जब हमास ने इस्राइल पर हमला कर 1,200 लोगों की जान ली और 251 लोगों को बंधक बना लिया। इसके बाद इस्राइल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अब तक 57,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इनमें से आधे से ज्यादा महिलाएं और बच्चे हैं।
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ट्रंप के दूत दोहा में करेंगे हमास से बातचीत
नेतन्याहू ने वॉशिंगटन में कहा कि वह और ट्रंप हमास को खत्म करने की रणनीति पर एकमत हैं। ट्रंप के मध्य पूर्व मामलों के दूत स्टीव विटकॉफ जल्द ही दोहा जाकर हमास से अप्रत्यक्ष वार्ता करेंगे। नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल-अमेरिका के बीच संबंध अब तक के सबसे मजबूत हैं और ईरान पर जीत के बाद अबू धाबी समझौते के दायरे को बढ़ाने का मौका है।