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SC: एल्गार परिषद मामले में आरोपी गौतम नवलखा की जेल से हुई रिहाई, एक महीने तक रहेंगे हाउस अरेस्ट

Sat, 19 Nov 2022 08:40 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

शीर्ष अदालत ने गौतम नवलखा को अपनी पार्टनर सहबा हुसैन के साथ रहने की इजाजत दे दी थी। जिसके बाद आज नवलखा को जेल से रिहा कर दिया गया। अब वे एक महीने तक हाउस अरेस्ट में रहेंगे। 
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गौतम नवलखा
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विस्तार
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एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में आरोपी गौतम नवलखा आखिरकार जेल से बाहर आ ही गए। उन्हें शनिवार शाम नवी मुंबई की तलोजा जेल से रिहा किया गया। अब वह एक महीने तक नजरबंद रहेंगे। गौरतलब है कि बीते गुरुवार (10 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि नवलखा को तलोजा जेल से रिहा करके नजरबंद रखा जाए। अदालत ने नवलखा के स्वास्थ्य कारणों के चलते ये राहत दी थी। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने कई शर्तें भी तय की हैं।

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जेल से बाहर आए गौतम नवलखा
शनिवार को जेल के बाहर आने के बाद, एक पुलिस टीम नवलखा को लेकर नवी मुंबई के बेलापुर-अग्रोली इलाके में एक इमारत में ले जाया गया। हाउस अरेस्ट की अवधि के दौराव वे यहीं रहेंगे। तलोजा जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नवलखा शाम करीब छह बजे जेल से निकले। इससे पहले, शुक्रवार दोपहर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नजरबंदी का विरोध करने वाली एनआईए की अर्जी खारिज कर दी थी। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश भी दिया था कि गौतम नवलखा को 24 घंटे के भीतर बिना देरी किए नजरबंद कर दिया जाए।

यह है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, अदालत ने नवलखा को अपनी पार्टनर सहबा हुसैन के साथ रहने की इजाजत दे दी थी। नवलखा को पुलिस अधिकारियों की ओर से मोबाइल फोन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वह रोजाना पांच मिनट अपने परिवार से बात कर सकेंगे। वहीं, पुलिस अधिकारियों को फोन कॉल की निगरानी करने और रिकॉर्ड रखने का अधिकार दिया गया है। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने आदेश दिया था कि खर्च का ड्राफ्ट पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में जमा कराया जाए। 
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इन शर्तों का भी करना होगा पालन
बता दें कि गौतम नवलखा नवी मुंबई में एक महीने के लिए नजरबंद रहेंगे। अदालत नवलखा के मुंबई में रहने के लिए कई शर्तें लगाई थी, जिनमें सुरक्षा के लिए 2.4 लाख रुपये जमा करने, कमरों के बाहर और आवास के प्रवेश एवं निकास द्वार पर सीसीटीवी कैमरे लगाना शामिल है। इस दौरान वह किसी भी तरह के संचार उपकरण यानी लैपटॉप, मोबाइल, कंप्यूटर आदि का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा वह न तो मीडिया से बात करेंगे और न ही मामले से जुड़े लोगों और गवाहों से बातचीत करेंगे। 

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