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Adani Group: इस्राइल का पोर्ट खरीदने के लिए अडानी ने पानी की तरह बहाया पैसा, बोली लगाने आईं कंपनियों का छूटा पसीना

Wed, 20 Jul 2022 12:51 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अडानी पोर्ट्स ने इस्राइल की कंपनी गैडोट ग्रुप से साझेदारी की है। इसमें अडानी पोर्ट्स की 70 प्रतिशत तो गैडोट की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है।बंदरगाह को अडानी ग्रुप ने 3.1 अरब शेकेल(1.18 अरब डॉलर) में खरीदा है।
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गौतम अडानी - फोटो : Instagram/gautam.adani
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विस्तार
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एशिया के सबसे दौलतमंद लोगों में शुमार गौतम अडानी के लिए महंगी से महंगी चीज खरीदना, चंद मिनटों का काम है। यह बात उन्होंने एक बार फिर से साबित कर दी है। अडानी ग्रुप ने इस्राइल के दूसरे सबसे बड़े बंदरगाह हाइफा पोर्ट का अधिग्रहण कर लिया है। इस अधिग्रहण की कहानी की अब इस्राइल से लेकर भारत तक चर्चा है। 

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दरअसल, अडानी ग्रुप ने इस बंदरगाह पर अधिग्रहण के लिए इतनी बड़ी बोली लगाई कि कीमत सुनकर कई कंपनियां पहले ही पीछे हट गईं, तो कईयों के उनसे टकराने से पहले ही पसीने छूट गए। इस बंदरगाह को अडानी ग्रुप ने 3.1 अरब शेकेल(1.18 अरब डॉलर) में खरीदा है। इस्राइल की मीडिया अब इस सौदे को रणनीतिक कदम बता रही है। 

इस सौदे के लिए पैसे मायने नहीं रखते 
एक इस्राइली अखबार ने इस सौदे पर अपनी रिपोर्ट पेश की है। उसने लिखा, नीलामी में भारतीय कंपनी और उसकी निकटतम प्रतिद्वंदी कंपनी के बीच बोली की कीमत में अंतर से पता चलता है कि इस सौदे के लिए अडानी ग्रुप के लिए पैसे मायने नहीं रखते। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक रणनीतिक सौदा है, इसलिए जैसे अडानी कह रहे हों सब लोग पीछे हट जाओ। 
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अडानी की कंपनी की 70 फीसदी हिस्सेदारी
इस पोर्ट के लिए अडानी पोर्ट्स ने इस्राइल की कंपनी गैडोट ग्रुप से साझेदारी की है। इसमें अडानी पोर्ट्स की 70 प्रतिशत तो गैडोट की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बताया जा रहा है कि पोर्ट की नीलामी में कई कंपनियां आईं थीं, लेकिन जब उन्होंने अडानी ग्रुप की बोली के बारे में सुना तो वह सभी कंपनियां पीछे हट गईं। बताया जा रहा है कि इस्राइल सरकार को भी अंदाजा नहीं था कि इसकी बोली इतनी जा सकती है। 

रणनीतिक रूप से हैं इस सौदे मायने
यह बोली ऐसे समय में लगाई गई है, जब I2U2 सदस्य देशों की वर्चुअल कांफ्रेंस हुई है। यह संगठन भारत, इस्राइल, अमेरिका और यूएई ने बनाया है। संगठन का उद्धेश्य आपसी साझेदारी व व्यापार के साथ  चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करना है। 

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