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गौरव भाटिया मानहानि केस: दास-रांका 24 घंटे में हटाएंगे पोस्ट, हाईकोर्ट ने दर्ज की अंडरटेकिंग; क्या है मामला?

Thu, 10 Sep 2026 02:38 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली।

सार

गौरव भाटिया मानहानि मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सीजेपी सदस्यों सौरव दास और आशुतोष रांका को 24 घंटे में विवादित पोस्ट हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान करते हुए सही और मर्यादित भाषा के इस्तेमाल पर जोर दिया। हालांकि, कोर्ट ने गौरव भाटिया की 'डायनेमिक इंजंक्शन' की मांग खारिज कर दी। क्या है पूरा मामला? जानिए...
 
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गौरव भाटिया मानहानी मामला - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया की दो करोड़ रुपये की मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सदस्यों सौरव दास और आशुतोष रांका की उस अंडरटेकिंग (सहमति) को ऑन रिकॉर्ड दर्ज किया, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया से विवादित पोस्ट हटाने की बात कही है।
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अदालत में गौरव भाटिया ने क्या आरोप लगाए?
जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ के समक्ष गौरव भाटिया खुद पेश हुए। उन्होंने पक्ष रखते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर मानहानि का मामला है। इंटरनेट पर उनकी तस्वीर के साथ एक फर्जी और मनगढ़ंत बयान लगाकर प्रचारित किया जा रहा है, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा है। भाटिया ने दलील दी कि इस तरह की फर्जी सामग्री को ऑनलाइन रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे उनकी सामाजिक और पेशेवर छवि को गहरा नुकसान पहुंच रहा है।

पोस्ट हटाने पर क्या फैसला हुआ?
सुनवाई के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे विवादित सोशल मीडिया सामग्री को डिलीट कर देंगे। सौरव दास के वकील ने बताया कि मुख्य ट्वीट पहले ही हटा दिया गया है, हालांकि कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि एक और पोस्ट भी शेयर की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों के बयानों को रिकॉर्ड पर लेते हुए 24 घंटे के भीतर सभी संबंधित विवादित पोस्ट हटाने के निर्देश जारी किए।
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अभिव्यक्ति की आजादी पर हाईकोर्ट की क्या टिप्पणी रही?
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार पर भी महत्वपूर्ण बात कही। पीठ ने टिप्पणी की कि हर व्यक्ति को विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन असहमति जताने के तरीके अलग और मर्यादित होने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अपनी बात को ज्यादा स्पष्ट और सही तरीके से रखना जरूरी है, ताकि जो संदेश पहुंचाया जा रहा है, वह सही तरीके से समझा जा सके और किसी की साख को गलत तरीके से नुकसान न पहुंचे।

कोर्ट ने गौरव भाटिया की कौन-सी मांग नहीं मानी?
इस सुनवाई में एक अहम पहलू डायनेमिक इंजंक्शन से जुड़ा रहा। गौरव भाटिया ने अदालत से मांग की थी कि आरोपियों के खिलाफ डायनेमिक इंजंक्शन जारी किया जाए, यानी ऐसा आदेश जिससे भविष्य में या किसी नए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस सामग्री की प्रतियां सामने आने पर खुद-ब-खुद रोक लग जाए। सौरव दास के अनुसार, हाईकोर्ट ने भाटिया की इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
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हर्जाने और कानूनी कार्रवाई में आगे क्या?
गौरव भाटिया ने इस याचिका में दो करोड़ रुपये के हर्जाने के साथ-साथ आरोपियों के खिलाफ स्थायी और अनिवार्य निषेधाज्ञा की मांग की है। अदालत ने पोस्ट हटाने के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन मुख्य मानहानि और फर्जी सामग्री से जुड़े मूल आरोपों पर अभी अंतिम न्यायिक फैसला आना बाकी है। दूसरी तरफ, सौरव दास ने सोशल मीडिया पर बताया कि वे और रांका कोर्ट के विस्तृत आदेश की प्रति का इंतजार कर रहे हैं।
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