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Assam : गौहाटी हाईकोर्ट ने केंद्र को दिया आदेश, 1994 में सेना द्वारा मारे गए युवकों के परिजनों को दे मुआवजा

Fri, 10 Mar 2023 02:53 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, गुवाहाटी।

सार

यह मामला फरवरी 1994 में तिनसुकिया जिले के डूमडूमा सर्कल से सेना द्वारा उठाए गए 'ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन' (AASU) के नौ सदस्यों में से पांच युवकों की हत्या से संबंधित है। दरअसल, फरवरी 1994 में उल्फा (ULFA) द्वारा एक चाय बागान के प्रबंधक की हत्या के बाद सेना ने ‘ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन’ के नौ लोगों को उठाया था। 
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गौहाटी उच्च न्यायालय। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गौहाटी उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र को असम के तिनसुकिया जिले में वर्ष 1994 में उग्रवाद रोधी अभियान के दौरान सेना द्वारा मारे गए पांच युवकों के परिवारों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। एक याचिकाकर्ता के वकील ने यह जानकारी दी।

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अधिवक्ता परी बर्मन ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि अदालत ने लंबा समय बीत जाने के मद्देनजर मामले को बंद घोषित कर दिया, क्योंकि मामले में सबूत या गवाहों को पेश करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति अचिंत्य मल्ला बुजोर बरुआ और न्यायमूर्ति रॉबिन फुकन की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। बर्मन ने कहा, यह मामला आज बंद कर दिया गया। माननीय अदालत ने भारत सरकार को आदेश दिया है कि वह पांच मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा दे।

यह मामला फरवरी 1994 में तिनसुकिया जिले के डूमडूमा सर्कल से सेना द्वारा उठाए गए 'ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन' (AASU) के नौ सदस्यों में से पांच युवकों की हत्या से संबंधित है। दरअसल, फरवरी 1994 में उल्फा (ULFA) द्वारा एक चाय बागान के प्रबंधक की हत्या के बाद सेना ने ‘ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन’ के नौ लोगों को उठाया था। तब ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) नेता जगदीश भुइयां, जो बाद में राज्य के मंत्री बने, ने नौ युवकों की सुरक्षा के डर से तुरंत उच्च न्यायालय के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus ) दायर किया था। जिसके कारण सेना को उनमें से चार को जीवित और अन्य के शवों को बाद में पेश करना पड़ा था।
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हत्याओं में शामिल ढोला कैंप की 18 पंजाब रेजिमेंट के सात कर्मियों को 2018 में सेना की एक अदालत ने दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बर्मन ने कहा कि तिनसुकिया के जिला न्यायाधीश को उन परिजनों की पहचान करने के लिए कहा गया है, जिन्हें मुआवजे के लिए 15 दिनों के भीतर अपना दावा पेश करना है। बर्मन ने कहा कि मुआवजे की राशि उच्च न्यायालय के पास जमा की जाएगी और पीड़ित परिवारों को जिला न्यायाधीश द्वारा चिन्हित किए जाने पर इसका भुगतान किया जाएगा।

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