गुजरात के उना में कथित गोहत्या के आरोप में दलित युवकों की बेरहमी से पिटाई के बाद अमरेली के ही राजौला कस्बे का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। आरोप है कि इलाके में गौरक्षकों के एक दल ने सात दलित युवकों को एक कमरे में जिंदा जलाने की कोशिश की थी।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक आरोपी युवक 30 की संख्या में थे। इन लोगों ने सात पीड़ित युवकों पर लोहे के पाइप, बेसबॉल बैट और तलवारें लेकर 22 मई को हमला कर दिया था।
पीड़ितों का कहना है कि वो सिर्फ इस वजह से जिंदा बचने में कामयाब हो सके क्योंकि ऐन मौके पर वहां पुलिस पहुंच गई थी, जिसे उनके समुदाय के लोगों ने सूचना दी थी।
पूरे ढाई घंटे तक चली थी क्रूरता
प्रवीन उर्फ रवि जखाड़ा उन सात पीड़ितों में से एक है जिनके साथ लगभग पूरे ढाई घंटे तक क्रूरता की गई। वो इस भयानक घटना को याद करते हुए बताते हैं कि 'चार गौ रक्षक हमारे हाथ पकड़े हुए थे और बाकी के सारे लोग हमें लोहे के डंडे और बैट से मार रहे थे।'
अगर हम एक भी शब्द बोलते तो वो हमें और ज्यादा मारते। ये उनके लिए बहुत नहीं था। उनमें से एक युवक ने केरोसिन डालकर उसी कमरे में हमें जिंदा जलाने की बात कही थी। 'मैने दो लोगों को केरोसिन लेने के लिए कमरे से बाहर जाते हुए देखा।'
रवि के पिता वीनूभाई ने देखा कि उनका बेटा और बाकी के पीड़ित बहुत बुरी तरह से डरे हुए हैं। उन्होंने समुदाय के अन्य लोगों को मामले की जानकारी दी जिसके बाद पुलिस को बुलाया जा सका।
'हमने उम्मीद छोड़ दी थी'
रवि के दाहिने हाथ में फैक्चर है वो कहता है कि 'हमने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन आखिरी वक्त पर पुलिस और समुदाय के लोग आ गए। उसकी इतनी बेरहमी से पिटाई की गई थी कि वो घटना के दो महीने बाद भी ठीक से चल नहीं पा रहा है।
दूसरा पीड़ित दिलीप बावरिया अभी जिंदगी और मौत के बीच के सदमें से उबर नहीं पाया है। वो रात में अचानक ' कृपया हमें मत मारो', 'हमें मत मारो कहते हुए नींद से जाग उठता है। वो कहता है कि हम लोग भाग्यशाली हैं कि हमारे परिवारवाले और पुलिस वक्त पर आ गई।
पुलिस से इस मामले पर पूछने पर डीएसपी (एससी/एसटी सेल) राजौला, डीजी भारबाड़ कहते हैं कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है।