क्यूआर का आशय क्विक रिस्पांस से है। क्यूआर बैँड में एक विशेष किस्म के पट्टे में क्यूआर कोड लगाया जाता है और इसमें कई तरह की जानकारियां शामिल की जाती हैं। बैंड को स्कैन करते ही उस व्यक्ति की सारी जानकारी सामने आ जाती है। जैसे उसका नाम क्या है और वह कहां का रहने वाला है, फोन नंबर और पता क्या है। इससे गुमशुदा बच्चों और बुजुर्गों को उनके परिवार तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। इन बैंड का नाम प्रशासन ने परिचय दिया है और यह लोगों को नि:शुल्क मिलेगा।
मेले में हजारों लोग बिछुड़ जाते हैं
इस मेले में करीब पांच से छह लाख वरिष्ठ नागरिक और बच्चे आते हैं और पंजीकृत आंकड़ों के अनुसार इनमें करीब दस हजार अपने परिजन से अलग हो जाते हैं। इनमें से करीब दो हजार मामले बहुत क्रिटिकल माने जाते हैं।
प्रशासन भीड़ पर नजर रखने के लिए एक विशेष तरह के सॉफ्टवेयर सागर सुरक्षा का प्रयोग करेगा। इससे लोगों की गणना करने और कैमरे से मिलने वाली फीड का विश्लेषण करने में आसानी होगी। यह सॉफ्टवेयर गलत जगह से मेले में घुसने वालों के अलावा भीड़ को लेकर अलर्ट जारी कर सकेगा। इसके अलावा अतिथि पथ नामक एप से मेले के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी। साथ ही पार्किंग के लिए वाहन दर्शन नामक विशेष प्रणाली का प्रयोग किया जाएगा
वेबसाइट से मंगा सकेंगे जल
जो लोग किसी कारणवश मेला नहीं आ पा रहे हैं उनके लिए ई-स्नान की सुविधा प्रदान की गई है। ये लोग गंगाजल के लिए वेबसाइट पर आर्डर दे सकते हैं और प्रसाद, टीका के साथ यह जल उन्हें भेज दिया जाएगा। प्रशासन को अबतक एक हजार से अधिक ऐसे आर्डर मिल चुके हैं। इससे लाइव गंगासागर भी देखा जा सकेगा और लोग शाही स्नान की अनुभूति ले सकेंगे।