पूरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जा रहा है। पुणे में एक दुकान ने इको-फ्रेंडली थीम को ध्यान में रखते हुए गणपति की मूर्तियों को पानीपूरी से बनाया गया है। एक मूर्ति को 10,000 पानीपूरी और बांस की डंडियों से बनाया गया है। गणेश भेल के मालिक एक अलग तरह की और यूनिक गणेश मूर्ति तब से बनाना चाहते थे जब उन्होंने बिस्कुट से बने गणपति देखे थे।
गणेश भेल के मालिक रमेश गुडमेवर ने कहा, 'चूंकि हमारा चाट का व्यवसाय है इसी वजह से मुझे यह विचार सूझा। 2011 में हमने भेल की सामग्री से गणपति बनाया था। इस बार हमने इसे
पानीपूरी से बनाने का सोचा।' कलाकार प्रशांत सालुंके ने इस मूर्ति को डिजायन किया है। उन्होंने कहा, 'मैंने इसे 10,000 पानी पूरी से बनाया है। मुझे इसे बनाने के लिए 100 घंटे काम करना पड़ा। इसे खराब होने से बचाने के लिए मैंने सख्त पानीपूरी का इस्तेमाल किया। इसमें उपयोग की गईं सारी सामग्री इको-फ्रेंडली है।'
इस विचार के बारे में सालुंके ने आगे कहा, 'यह विचार ऐसे आया कि गणेशा खुद भेल वितरित कर रहे हैं और उनका चूहा इसमें उनकी मदद कर रहा है। उनकी
मूर्ति के पीछे बना सूर्य ऊर्जा को दर्शाता है क्योंकि मालिक को अपनी दुकान चलाने के लिए ऊर्जा की जरुरत है।' 10 दिनों का यह हिंदू त्योहार नई शुरुआत के भगवान को समर्पित है। इसमें गणपति बप्पा को लोग अपने घर लेकर आते हैं।