फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gandhi Peace Prize: कांग्रेस ने उठाए सवाल, कहा- गीता प्रेस को पुरस्कार देना सावरकर को पुरस्कृत करने जैसा

Mon, 19 Jun 2023 02:35 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गीता प्रेस को साल 2021 का गांधी शांति पुरस्कार दिए जाने के एलान के बाद पक्ष-विपक्ष में वार-पलटवार का खेल शुरू हो गया है। कांग्रेस गीता प्रेस को पुरस्कार देने की तुलना ‘सावरकर और गोडसे से कर रही है।
 
विज्ञापन
गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने पर कांग्रेस-भाजपा नेताओं में रार। - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

धर्म, संस्कृति और परंपरा को समेटे गीता प्रेस को साल 2021 का गांधी शांति पुरस्कार दिए जाने के एलान के साथ ही अब इस पर सियासत होने लगी है। सरकार और विपक्ष पार्टी के नेताओं के बीच वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया। एक ओर, कांग्रेस पार्टी ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार दिए जाने के आदेश के तुरंत बाद सवाल उठा दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार 2021 देना ‘सावरकर और गोडसे को पुरस्कृत करने’ जैसा है। 

विज्ञापन


जयराम रमेश का सरकार पर वार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने अक्षय मुकुल द्वारा लिखित ‘गीता प्रेस एंड द मेकिंग ऑफ हिंदू इंडिया’ का कवर पेज साझा किया। साथ में तर्क देते हुए कहा कि ये किताब बहुत अच्छी जीवनी है। उन्होंने कहा कि लेखक ने इसमें संगठन के महात्मा के साथ तकरार भरे संबंधों और राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक एजेंडे पर उनके साथ चल रही लड़ाइयों का खुलासा किया है। गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार 2021 देना ‘सावरकर और गोडसे को पुरस्कृत करने’ जैसा है। ये फैसला एक उपहास की तरह है।
 

यह है मामला
दरअसल, गांधी शांति पुरस्कार महात्मा गांधी द्वारा स्थापित आदर्शों को श्रद्धांजलि के रूप में 1995 में भारत सरकार द्वारा स्थापित एक वार्षिक पुरस्कार है। संस्कृति मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली जूरी ने सर्वसम्मति से गीता प्रेस, गोरखपुर को गांधी शांति पुरस्कार के रूप में चुनने का फैसला किया। 

विज्ञापन

 

इसी साल गीता प्रेस ने 100 वर्ष पूरे किए हैं। बता दें कि गीता प्रेस की स्थापना करने वाले चूरू राजस्थान के रहने वाले जयदयालजी गोयंदका (सेठजी) गीता-पाठ, प्रवचन में बहुत रुचि लेते थे। व्यापार के सिलसिले में उनका कोलकाता आना-जाना होता रहता था। वहां वह दुकान कि गद्दियों में भी सत्संग किया करते थे। धीरे-धीरे सत्संगियों की संख्या इतनी बढ़ गई कि जगह की समस्या खड़ी होने लगी। इसपर उन्होंने कोलकाता में बिड़ला परिवार के एक गोदाम को किराए पर लिया और उसका नाम रखा गोविंद भवन।
 

41.7 करोड़ पुस्तकें प्रकाशित 
बता दें, दुनिया के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक गीता प्रेस की स्थापना सन् 1923 में हुई थी। केंद्रीय मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, इसने 14 भाषाओं में 41.7 करोड़ पुस्तकें प्रकाशित की हैं, जिनमें 16.2 करोड़ श्रीमद् भगवद गीता शामिल हैं।
 

पीएम ने दी बधाई
इस बीच, पीएम मोदी ने पुरस्कार जीतने के लिए गीता प्रेस को बधाई दी और क्षेत्र में इसके योगदान की सराहना की। पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि मैं गीता प्रेस, गोरखपुर को गांधी शांति पुरस्कार 2021 से सम्मानित किए जाने पर बधाई देता हूं। उन्होंने लोगों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन को आगे बढ़ाने की दिशा में पिछले 100 वर्षों में सराहनीय काम किया है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गोरखपुर स्थित 'गीता प्रेस' को गांधी शांति पुरस्कार 2021 से सम्मानित किए जाने पर बधाई दी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें