2. दोनों तरफ के जवानों के बीच 5-6 मई को पैंगॉन्ग त्सो में हिंसक झड़प हुई थी। इसके बाद उत्तरी सिक्किम में भी इसी तरह की घटना घटी थी। यही वजह है कि बीते करीब डेढ़ महीने में दोनों ओर के सैनिकों के बीच ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं और हालात बिगड़े हैं।
3. गलवां घाटी में झड़प की यह ताजा घटना तब सामने हुई है, जब संघर्ष से बचने और विवाद सुलझाने के लिए वार्ता प्रक्रिया जारी है। यह घटना आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवने के उस बयान के एक दिन बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों ने गलवां घाटी में "चरणबद्ध तरीके से" पीछे हटना शुरू कर दिया है। उन्होंने दोनों देशों के बीच हुई वार्ता को सफल बताया था।
6. पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद तब शुरू हुआ जब चीनी सैनिकों ने चार स्थानों पर घुसपैठ की और भारतीय सीमा में काफी अंदर तक आ गए। मई की शुरू में चीन ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारी वाहन, टैंक, तोपखाने और 6,000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया।
7. लद्दाख में चल रहा गतिरोध डेपसांग और चुमार जैसे पहले से चले आ रहे गतिरोध से अलग है। यह गश्त के दौरान शुरू हुआ संघर्ष नहीं है। यह चीन की ओर से भारत के कई स्थानों पर एक साथ दबाव बनाने के लिए एक सुविचारित कदम माना जा रहा है।
8. चीन ने इन स्थानों पर सैन्य उपकरण जुटाए हैं, जिनमें एलएसी के किनारे तोपखाने और यहां तक कि टैंक भी शामिल हैं। पीएलए ने एलएसी के पास अपने ठिकानों में तोपखाना, बंदूकों, पैदल सेना, वाहन और भारी सैन्य उपकरणों के साथ अपनी रणनीति को मजबूत किया है।
9. इस बीच, भारत ने भी इन स्थानों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया है। भारत की सेना ने चीनी सैन्य बल की संख्या के मुताबिक अपने सैनिकों और उपकरणों को तैनात किया है। साथ ही भारत ने चीन के विरोध के बाद भी सीमा पर अपनी परियोजनाओं को नहीं रोका। 3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी पर भारत-चीन के बीच गई जगहों पर सीमा को लेकर विवाद है। इसका एक प्रमुख कारण अरुणाचल प्रदेश भी है, जिसे चीन दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा मानता है।
10. हालांकि उच्च-स्तरीय प्रयासों के बावजूद स्थिति सामान्य होना और गतिरोध समाप्त होना अभी संभव नहीं लग रहा है। संभावना है कि यह गतिरोध लंबे समय तक जारी रह सकता है, क्योंकि चीन पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने वास्तविकता से उलट दावा करते हुए एक चेतावनी देते हुए कहा था कि भारतीय सैनिकों ने झड़पें शुरू की थीं क्योंकि वे चीनी सीमा पार कर गए थे और चीनी सैनिकों पर हमले किए थे।