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सड़क से लेकर सरहद तक हर मोर्चे पर डटे हम, हर मोर्चे पर जीतेंगे हम 

Wed, 17 Jun 2020 01:19 AM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली 
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डॉक्टर, पुलिस और फौज, सभी मोर्चे पर जुटे हुए हैं - फोटो : Amar Ujala Graphics
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देश के सामने चुनौतियां पहले ही कम नहीं थीं, लेकिन साल 2020 ने तो हमारे सामने परेशानियों का पहाड़ खड़ा कर दिया। कोरोना से तो हम लड़ ही रहे थे, मगर इस मुसीबत की घड़ी में भी पड़ोसी अपनी हरकतों से बाज नहीं आए। पाकिस्तान तो था ही, अब नेपाल और चीन ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं। 

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बावजूद इसके हमारे कंधे झुके नहीं हैं। हम हारे नहीं हैं, डटे हुए हैं। चुपचाप हमारे घरों के भीतर घुसपैठ करने वाले कोरोना के सामने भी और सरहद पर दुश्मनों के आगे भी। संकट के समय में हर तरह की वर्दी अपनी ड्यूटी पर मुस्तैदी से तैनात है। अस्पताल में सफेद रंग का कोट पहने योद्धा रोज अपनी जान जोखिम में डालकर कोरोना से जंग लड़ रहे हैं।


वहीं सड़कों पर खाकी वर्दी पहने पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था बनाने में दिनरात एक किए हुए हैं। बगैर खुद की चिंता किए हुए। अपनी ड्यूटी निभाते हुए कितने पुलिसकर्मी तो अपनों से मिले बगैर ही दुनिया को अलविदा कह गए। 
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सरहद पर भी गहरे हरे रंग की वर्दी पहने हमारी सेना के जवान एलएसी पर मुस्तैदी से तैनात हैं। हाथ में हथियार भले न हों, लेकिन दिल में अपने देश के लिए मर-मिटने का जज्बा भरपूर है। इसी वजह से ड्रैगन अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पा रहा है। पाकिस्तान को भी हमारे जवान रोज मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। यही नहीं हमें आंख दिखाने वाले नेपाल की चुनौतियों का भी हम सामना कर रहे हैं। इस सबके बावजूद सड़क से लेकर सरहद तक हम डटे हैं। भरोसा है कि जल्द ही इन सब चुनौतियों को धूल चटाकर हम जीतेंगे।

सफेद कपड़ों में तैनात सैनिक 

मरीज की जांच करते डॉक्टर (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
कोरोना से जंग में एक पूरी सेना अपनी परवाह किए बिना जुटी हुई है। इनकी वर्दी का रंग खाकी या हरा नहीं बल्कि सफेद है। हाथ में बंदूक नहीं है। हजारों स्वास्थ्यकर्मी दिनरात मरीजों का इलाज करने में लगे हुए हैं। जबकि उनके लिए संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है। इसी महीने की शुरुआत में दिल्ली के एम्स में 479 मेडिकल कर्मी इलाज के दौरान खुद संक्रमित हो गए। यही नहीं राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 81 और लोकनायक अस्पताल में 83 स्वास्थ्यकर्मी पॉजिटिव पाए गए। 

नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा पाक 

फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
इस साल 10 जून तक पाकिस्तान 2027 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर चुका है। हालांकि हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी है। कोरोना की चुनौतियों के बीच यह हरकत पिछले साल की तुलना में 69 फीसदी ज्यादा है। साल 2019 में इस समय तक पाक ने 926 बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया था। 

आतंकियों को भी मुंहतोड़ जवाब 
जम्मू व कश्मीर से 370 हटाने के बाद से पाकिस्तान ही नहीं आतंकी भी बुरी तरह बौखलाए हुए हैं। इसी वजह से वे आम नागरिकों तक को निशाना बना रहे हैं। इसके बावजूद हमारे जवान उन्हें मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। अप्रैल माह में 11 अभियानों में 30 आतंकियों को ढेर किया गया। यही नहीं इस महीने जून के पहले दो हफ्ते में 27 आतंकियों को मार गिराया जा चुका है। 

हमारे हिस्से को अपना बता रहा नेपाल

Indo nepal border - फोटो : अमर उजाला।
नेपाल ने पहले हमारे क्षेत्र को अपने नक्शे में दिखाकर नया विवाद खड़ा किया। फिर अपने देश में कोरोना प्रसार के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। यही नहीं पहली बार भारत-नेपाल सीमा पर गोली चली। हमारे एक नागरिक की जान गई। बिहार के सीतामढ़ी के सोनबरसा में दोनों देशों की सीमा पर नेपाल पुलिस की ओर से हुई फायरिंग में एक भारतीय की मौत हो गई थी और दो घायल हो गए थे। भारत इस मामले को भी कूटनीतिक तरीके से संभालने की कोशिश में लगा हुआ है। 
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एलएसी पर 45 साल में पहली बार भारतीय जवान शहीद 

एलएसी पर सैन्य अधिकारी समेत 20 जवान शहीद हो गए - फोटो : PTI
ये सब चुनौतियां कम नहीं थीं, लेकिन चीन ने तो हद ही कर दी। पिछले एक महीने से बार-बार आंख दिखाने वाले चीन ने पूर्वी लद्दाख की गलवां वैली में सारी सीमाएं पार कर दीं। हिंसक झड़प में हमारे 20 जवान शहीद हो चुके हैं। हालांकि जवाबी कार्रवाई में उनके भी 47 सैनिक हताहत हुए हैं। ड्रैगन ने कोशिश तो पूरी की, लेकिन बगैर हथियारों के सीमा की सुरक्षा में दीवार की तरह खड़े हमारे जवानों से पार नहीं पा सके। 
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