गणतंत्र दिवस पर बीएसएफ के सात जवानों को 'पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री' यानी 'वीरता का पुलिस पदक' सम्मान देने की घोषणा की गई है। ये सभी जवान बीएसएफ की 59वीं बटालियन में तैनात हैं। नवंबर 2020 में ये जवान, 120 इन्फैंट्री ब्रिगेड 'आर्मी ऑप्स कंट्रोल' के तहत बंप कॉम्प्लेक्स 'एलसी' के एफडीएल हजूरा पर तैनात थे। 30 नवंबर, 2020 को बीएसएफ बटालियन की घातक टीम, जिसमें एक एसओ और सात अन्य रैंक वाले जवान थे, को आतंकियों के प्रत्याशित प्रवेश मार्ग पर तैनात किया गया।
इस टीम का नेतृत्व सब-इंस्पेक्टर (जीडी) पाओटिनसैट गुइटे कर रहे थे। आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए शुरू हुई एक बड़ी कार्रवाई में पाओटिनसैट गुइटे शहीद हो गए थे। उन्होंने अपनी सूझबूझ से जानमाल के एक बड़े नुकसान को टाल दिया था। गुइटे की अतुलनीय बहादुरी पर उन्हें कीर्ति चक्र प्रदान किया गया था। उस कार्रवाई में बीएसएफ टीम ने हिजबुल मुजाहिदीन के तीन आतंकवादी मार गिराए थे।
पाकिस्तान की ओर से हुआ था घुसपैठ का प्रयास
1 दिसंबर 2020 को साढ़े आठ बजे बीएसएफ टीम अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद थी। तभी दमयकुश नाले (पाकिस्तान की तरफ) की ओर से बल की घातक टीम पर गोलीबारी की गई। चूंकि, सब-इंस्पेक्टर (जीडी) पाओटिनसैट गुइटे, उस इलाके की परिस्थिति और दुश्मन की रणनीति से भली भांति परिचित थे, उन्होंने तुरंत अपनी फौलादी प्रवृत्ति, युद्ध बहादुरी और साहस की उच्चतम भावना का प्रदर्शन करते हुए स्थिति पर नियंत्रण पाया। फायरिंग के बीच उन्होंने दोबारा से अपनी टीम को पॉजिशन लेने के लिए कहा। उबड़-खाबड़ जमीन, घनी वनस्पति और भारी खनन के बीच उन्होंने बेहतरीन समन्वय के साथ आतंकियों का मुकाबला किया। फायरिंग के दौरान, एक आतंकवादी की गोली सब-इंस्पेक्टर पाओटिनसैट गुइटे के बाएं हाथ में लगी और बुलेट प्रूफ जैकेट की पट्टी को फाड़ते हुए दाहिने कंधे के पीछे से निकल गई। घायल होने के बावजूद, गुइटे ने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया। उन्होंने उस आतंकवादी पर तब तक गोलीबारी की, जब तक कि वह नीचे नहीं गिर पड़ा। दिवंगत एसआई गुइटे की घातक पार्टी ने मोर्चा संभाला। सभी जवान, गुइटे की रणनीति पर आगे बढ़े। आतंकवादियों ने बम्प परिसर में घुसकर ऑप्स लिंक को लक्षित करने की योजना बनाई थी। बीएसएफ टीम की कार्रवाई के चलते तीनों कट्टर आतंकी, अपने इरादों में कामयाब नहीं हो सके।
इन सात जवानों ने संभाला मोर्चा
बीएसएफ की एंबुश पार्टी के बाकी सदस्य, जिनमें कांस्टेबल बोल्लम रमनजनेयुलु, कांस्टेबल अवनीश कुमार, कांस्टेबल एमडी बकीबुल्ला हक, कांस्टेबल अवतार सिंह, कांस्टेबल अनिल यादव, कांस्टेबल अनिल शर्मा और कांस्टेबल राजू चौधरी ने आतंकवादियों को अपनी आक्रामक कार्रवाई में उलझाए रखा। इसी बीच पाकिस्तान की निकटवर्ती चौकियों, मोहरा ओपी और लेफ्ट ओपी से खुद की चौकियों यानी एफडीएल 3 बंप, एफडीएल 5 बंप और एफडीएल 7 बंप से फायरिंग शुरू कर दी गई। इसके पीछे मकसद यह था कि जो आतंकी, बीएसएफ टीम के टारगेट पर थे, उन्हें वहां से निकालने में मदद करना था। पाक चौकियों से आ रही आग का तुरंत और आक्रामक रूप से जवाब दिया गया। दुश्मन की चौकियों और आतंकवादियों द्वारा की जा रही भारी गोलीबारी के बीच, बीएसएफ टीम ने घायल सब-इंस्पेक्टर पाओटिनसैट गुइट को संकीर्ण इन्फैंट्री सेफ लेन (आईएसएल) के माध्यम से एक रिज पर स्थित एफडीएल 3 ओपी तक पहुंचाया।
तीन पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए
आतंकवादियों के साथ इस क्लोज क्वॉर्टर गन फाइट के दौरान, बीएसएफ टीम ने नियंत्रण रेखा पर अदम्य साहस, विशिष्ट वीरता और कर्तव्य के प्रति पूर्ण समर्पण का परिचय दिया था। एसआई (जीडी) पाओटिनसैट गुइटे के गतिशील नेतृत्व में एंबुश पार्टी द्वारा त्वरित प्रतिशोध के परिणामस्वरूप एचएम (हिजबुल मुजाहिदीन) के तीन पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए। उनके नाम अबू बिलाल, नासिर जावेद और जावेद भाई थे। बीएसएफ जवानों ने अपनी कमान के तहत सैनिकों की जान बचाई। उन्होंने आतंकवादियों को भारी नुकसान पहुंचाया। इस गोलाबारी के दौरान, बीएसएफ कर्मियों ने अदम्य साहस एवं विशिष्ट वीरता का परिचय दिया। बीएसएफ टीम की विशिष्ट वीरतापूर्ण कार्रवाई और प्रतिकूल परिस्थितियों में आतंकवादी हमले को नाकाम करना, इसके लिए सिपाही अवनीश कुमार, मोहम्मद बाकिबुल्ला हक, अवतार सिंह, अनिल यादव, अनिल शर्मा, राजू चौधरी और बोल्लम रमनजनेयुलू को एचएम समूह के तीन उग्रवादियों का खात्मा करने के लिए 'वीरता के लिए पुलिस पदक' से सम्मानित किया गया है।