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2026: गगनयान से लेकर निजी कंपनियों के रॉकेट लॉन्च तक... अंतरिक्ष में होगा भारत का बोलबाला; पढ़ें प्रमुख मिशन

Thu, 01 Jan 2026 07:39 PM IST
लव गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ISRO Space Missions 2026: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र 2026 में कई बड़े और ऐतिहासिक मिशन को पूरा करने की तैयारी में है। इस साल गगनयान से लेकर निजी कंपनियों के रॉकेट लॉन्च तक भारत स्पेस में अपनी धमक और मजबूत करेगा। इस साल बिना क्रू वाला गगनयान मिशन आसमान में उड़ान भरेगा।
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भारत के स्पेस सेक्टर की मुख्य बातें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक ऐतिहासिक यात्रा के बाद भारत अब अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। वर्ष 2026 में भारत का पहला मानवरहित गगनयान मिशन अंतरिक्ष में उड़ान भरेगा, जो देश के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। इसके साथ ही निजी अंतरिक्ष कंपनियां स्काईरूट एयरोस्पेस और अग्निकुल कॉसमॉस भी अपने स्वदेशी रॉकेट्स के जरिए उपग्रह लॉन्च करने की तैयारी में हैं, जिससे भारत वैश्विक स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करेगा।
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साल 2026 में पहली बार होगा जब पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) रॉकेट पूरी तरह निजी कंपनी बनाएंगी। जिसे 2023 में ISRO से कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो ने बनाया है। मालूम हो कि यह रॉकेट इसरो का सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल में से एक है। इसी से चंद्रयान-1 जैसे मिशन ने भी उड़ान भरी थी। PSLV 2026 की पहली तिमाही में Oceansat-3A या EOS-10 को लेकर उड़ान भरेगा.

Oceansat-3A समुद्र से जुड़ी जानकारी जुटाने वाला यान होगा। इससे समुद्र की हालत, मछली पकड़ने के इलाके, तटीय क्षेत्र, मौसम और समुद्री जीवन को समझने में मदद मिलेगी। इसमें समुद्र के रंग और सतह के तापमान को मापने वाले खास उपकरण लगे होंगे।
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G-1 मार्च 2026 तक लॉन्च
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले महीने संसद में बताया था कि गगनयान मिशन का पहला ऑर्बिटल टेस्ट G-1 मार्च 2026 तक लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन में ह्यूमनॉइड रोबोट ‘व्योममित्र’ को भेजा जाएगा, जो अंतरिक्ष यात्री के कार्यों का अनुकरण करेगा। यह मिशन लो-अर्थ ऑर्बिट में क्रू सिस्टम्स की जांच करेगा, जिसके बाद भारत 2027 में मानव अंतरिक्ष उड़ान का लक्ष्य रख रहा है।

इंडियन स्पेस एसोसिएशन (ISpA) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल ए. के. भट्ट के अनुसार, '2026 भारत के लिए एक निर्णायक वर्ष होगा, जहां क्वांटम टेक्नोलॉजी, 3D प्रिंटेड इंजन, हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट्स और निजी लॉन्च पैड जैसी बुनियादी सुविधाओं में बड़ी प्रगति देखने को मिलेगी।”

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नई तकनीक पर चल रहा काम
पिछले वर्ष शुभांशु शुक्ला ने Axiom-4 कमर्शियल मिशन के तहत ISS की यात्रा कर इतिहास रचा था। उन्होंने 18 दिन अंतरिक्ष में रहकर माइक्रो-ग्रैविटी प्रयोग किए, जो गगनयान जैसे मिशनों के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे। IIT-मद्रास से इनक्यूबेटेड स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस पुन: उपयोग योग्य रॉकेट्स और रॉकेट के अपर-स्टेज को सैटेलाइट में बदलने की तकनीक पर काम कर रहा है। कंपनी के CEO श्रीनाथ रविचंद्रन ने बताया कि यह तकनीक लॉन्च लागत को काफी कम कर सकती है।

वहीं, स्काईरूट एयरोस्पेस ने हाल ही में अपने रॉकेट विक्रम-1 का अनावरण किया, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली लॉन्च किया था। कंपनी 2026 की शुरुआत में इसके जरिए कमर्शियल पेलोड लॉन्च करने की योजना बना रही है। बेंगलुरु स्थित डिगंतारा इंडस्ट्रीज ने पिछले साल दुनिया का पहला स्पेस सर्विलांस सैटेलाइट SCOT लॉन्च किया था और 2026 में आठ और सैटेलाइट्स लॉन्च करने की तैयारी है।

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मार्च 2026 से पहले सैटेलाइट लॉन्च
ISRO द्वारा TDS-01 सैटेलाइट भी लॉन्च किया जाएगा, जिसमें हाई थ्रस्ट इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम, क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन और स्वदेशी ट्रैवलिंग वेव ट्यूब एम्पलीफायर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का परीक्षण होगा। इससे भविष्य में हल्के और कम ईंधन वाले ऑल-इलेक्ट्रिक सैटेलाइट्स संभव हो सकेंगे। इसके अलावा, SSLV (स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) के जरिए भी मार्च 2026 से पहले एक समर्पित सैटेलाइट लॉन्च किया जाएगा।

स्पेस-टेक स्टार्टअप गैलेक्सआई (GalaxEye) भी 2026 की पहली तिमाही में दुनिया का पहला मल्टी-सेंसर अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ‘मिशन दृष्टि’ लॉन्च करेगा। यह सैटेलाइट सीमा सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और रक्षा जैसे क्षेत्रों में रियल-टाइम जियोस्पेशियल डेटा उपलब्ध कराएगा। कुल मिलाकर 2026 भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है, जहां सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर देश को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित करेंगे।

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