भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारियों को लेकर एक अहम उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस सफलता पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को बधाई दी है। उन्होंने बताया कि गगनयान मिशन के तहत दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह परीक्षण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में आयोजित किया गया।
IADT यानी इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट गगनयान मिशन का एक बेहद अहम और तकनीकी रूप से जटिल परीक्षण है। इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है।
जब अंतरिक्ष यात्री अपना मिशन पूरा कर लौटेंगे, तब उनका क्रू मॉड्यूल पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक गति से प्रवेश करेगा। इस दौरान उसकी रफ्तार को नियंत्रित करना और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होता है। यहीं पर पैराशूट सिस्टम की भूमिका अहम हो जाती है। यह प्रणाली क्रू मॉड्यूल की गति को धीरे-धीरे कम करती है और उसे सुरक्षित रूप से समुद्र या निर्धारित स्थान पर उतारती है।
सरकार ने गगनयान कार्यक्रम के लिए लगभग 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह मिशन अब अपने अंतिम चरण में है और पहली मानवयुक्त उड़ान 2027 की पहली तिमाही में होने की उम्मीद है।
इससे पहले, 8 अप्रैल को, इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा था कि मानवरहित गगनयान मिशन की सभी तैयारियां सुचारू रूप से चल रही हैं। स्मार्ट स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशंस पर दूसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए उन्होंने कहा, "हम पहले मानवरहित गगनयान मिशन से ठीक पहले मिल रहे हैं। यह कोई साधारण मिशन नहीं, बल्कि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मिशन है। अंतिम मानवयुक्त प्रक्षेपण से पहले तीन मानवरहित मिशन होंगे। पहले मिशन की सभी गतिविधियां अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं, हालांकि चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।"
गगनयान मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (गगनयात्रियों) को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।
मिशन का ओवरव्यू
गगनयान के तहत 3 अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग 400 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित लो अर्थ ऑर्बिट में भेजा जाएगा, जहां वे करीब 3 दिनों तक अंतरिक्ष में रहेंगे। इसके बाद क्रू मॉड्यूल के जरिए उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाएगी।
मिशन के चरण
इस मिशन को कई चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले मानवरहित परीक्षण मिशन किए जा रहे हैं, जिनमें सिस्टम की सुरक्षा और विश्वसनीयता परखी जा रही है। इन परीक्षणों के सफल होने के बाद पहला मानवयुक्त मिशन प्रस्तावित है, जिसकी संभावित समयसीमा 2027 की शुरुआत मानी जा रही है।
मिशन का महत्व
गगनयान की सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जिनके पास मानव अंतरिक्ष उड़ान की क्षमता है। अभी तक यह उपलब्धि केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के पास है।
गगनयान के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्री
इस मिशन के लिए भारतीय वायुसेना के चार पायलटों को अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया है-
ये सभी अंतरिक्ष यात्री मिशन के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और भविष्य में भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा बन सकते हैं।