प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान कोविड19 महामारी और इसके मानवीय और आर्थिक निहितार्थों पर समन्वित वैश्विक प्रतिक्रिया के दौरान जी20 के नेताओं को संबोधित किया। एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इस दौरान पीएम के साथ मौजूद रहे।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि चर्चा के दौरान किसी भी नेता ने महामारी के समय को परिभाषित करने की कोशिश नहीं की क्योंकि इसे परिभाषित नहीं किया जा सकता। अधिक प्रभावी और तेज डायग्नोस्टिक किट विकसित करने और उन्हें शीघ्र उपलब्ध करने के तरीके पर जरूर चर्चा की गई।
सूत्र ने कहा कि जी20 नेताओं ने इस बात की सराहना की कि भारत ने न केवल क्षेत्रीय स्तर पर बल्कि कोविड19 महामारी से लड़ने के लिए वैश्विक स्तर पर भी भूमिका निभाई। सूत्रों ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुखों ने भी शिखर सम्मेलन की शुरुआत में संबोधित किया। यह निर्णय लिया गया कि जी20 कोविड19 पर एक योजना लेकर आएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोविड19 का संकट बीते तीन महीने से जारी है और हम अभी भी इससे निपटने के तरीके खोज रहे हैं। पूरा विश्व हमारी ओर से उठाए गए कदमों को देख रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि खतरनाक महामारी की सामाजिक और आर्थिक लागत का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि कोविड19 के 90 फीसदी मामले और 88 फीसदी मौतें जी20 देशों में हुई हैं। जबकि जी20 देश का विश्व जीडीपी में 80 फीसदी हिस्सा है और उनकी आबादी विश्व जनसंख्या की 60 फीसदी है।
कोविड19 महामारी की आर्थिक और सामाजिक लागत कम करने और वैश्विक वृद्धि, बाजार स्थिरता और मजबूती को बरकरार रखने के लिए सभी उपलब्ध नीतिगत संसाधनों का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध जी20 नेताओं ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में पांच हजार अरब डॉलर के निवेश को लेकर भी प्रतिबद्ध जताई।
कोविड19 महामारी को रोकने और लोगों की सुरक्षा के लिए जी20 नेताओं ने सभी आवश्यक उपाय करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने महामारी के खिलाफ लड़ाई में डब्ल्यूएचओ के निर्देशों को लागू करने को लेकर भी सहमति जताई। जिसमें चिकित्सा आपूर्ति, नैदानिक उपकरण, उपचार, दवाएं और टीके की डिलीवरी शामिल हैं।