कोरोना वायरस से दुनिया भर में चार लाख 51 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं और मरने वालों की संख्या 20,000 के पार पहुंच गई है। केवल भारत में ही कोरोना के 600 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। जिनमें से 13 लोगों की मौत हो चुकी है कोरोना वायरस और न फैले, इसके लिए पूरे देश में 21 दिनों के लॉकडाउन का एलान किया गया है।
इसी बीच कोरोना वायरस को लेकर तरह-तरह की खबरें वायरल हो रही हैं। कभी कहा जा रहा है कि शराब पीने वालों को कोरोना वायरस का खतरा नहीं है तो कभी जियों की तरफ से फर्जी मैसेज वायरल कर लोगों से लाखों की घोखाधड़ी की जा रही है। ऐसे में लोग कन्फ्यूज हैं कि क्या सही है और क्या गलत। लोगों में उभरी ऐसी ही कुछ गलतफहमियों को दूर करने के लिए आइए जानते हैं इन बातों में कितनी सच्चाई है।
तथ्य: वाट्सएप के माध्यम से फैलाई जा रही ये जानकारी सरासर गलत है। इसके पीछे अध्ययन ये कहता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित कई युवा मरीज अपनी सांस 10 सेकेंड से ज्यादा समय तक रोक कर रख सकते हैं। जबकि कई बुजुर्ग जो इस वायरस से पीड़ित नहीं हैं, वह अपनी सांस नहीं रोक सकते। ऐसे में अगली बार जब ये खबर आप तक पहुंचे तो आपको इन खबरों पर यकीन नहीं करना है।
तथ्य: वायरस हमारे गले के रास्ते शरीर में दाखिल तो जरूर हो सकता है, लेकिन यह होस्ट सेल्स में प्रवेश करता है। आप इसे गरम पानी पीकर दूर नहीं कर सकते। ये अफवाह भी फेक्ट चेक में गलत साबित होती है। हमारा अनुरोध है कि इस तरह वायरल हो रही किसी भी खबर पर आंख बंद करके भरोसा न करें। इसकी सही पड़ताल करें और जिम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य निभाएं।
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के चीफ क्वालिटी ऑफिसर डॉक्टर फहीम यूनुस ने ने सोशल मीडिया पर किए जा रहे ऐसे दावों को महज अफवाह बताया है।तथ्य- जैसे ही लोगों तक ये बात वाट्सएप के जरिए फैली मलसुन खरीदने के लिए बाजारों में भीड़ उमड़ पड़ी। लोग भारी मात्रा में लहसुन खरीदने लगे बिना ये सोचे कि इस खबर में जरा भी सच्चाई है या नहीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लहसुन में कुछ एंटीमाइक्रोबाइल प्रॉपर्टी होती हैं, लेकिन इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिल पाया है कि लहसुन कोरोना वायरस के खिलाफ काम करता है। इस बात के भी कोई प्रमाण नहीं हैं कोई एक फूड कोविड-19 को रोक सकता है। अगर ऐसा होता तो सबसे पहले भारत में इसकी वैक्सीन बनकर तैयार हो गई होती।