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G20: कोणार्क चक्र, योग मुद्राओं से लेकर नटराज मूर्ति तक, मेहमानों के स्वागत में ऐसे दिखी हमारी सांस्कृतिक झलक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sat, 09 Sep 2023 05:28 PM IST

सार

G20 Summit: जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान आज वैश्विक नेताओं और प्रतिनिधियों ने भारतीय संस्कृति की झलक देखी। मेहमान जिस गलियारे से गुजरे उसकी दीवारें नटराज मूर्ति, योग मुद्रा और कोणार्क चक्र जैसे ऐतिहासिक प्रतीकों को प्रदर्शित कर रही थीं।
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जी20 शिखर सम्मेलन - फोटो : AMAR UJALA
नई दिल्ली में आज से दो दिवसीय जी20 शिखर सम्मेलन का आगाज हो गया है। जी20 समूह में शामिल देशों के राष्ट्राध्यक्ष, यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि और नौ मेहमान देशों के प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आए हैं। इसके अलावा कई वैश्विक संगठनों के प्रमुख भी इसमें शिरकत कर रहे हैं। कार्यक्रम का आयोजन प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में हो रहा है। जहां मेहमान इकट्ठा हुए हैं वहां भारत और इसके इतिहास का बोध कराने के लिए कई प्रतीकों को भी लगाया गया है।

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के नेताओं का स्वागत कर रहे थे, उस वक्त नटराज प्रतिमा, योग मुद्राओं से लेकर कोणार्क चक्र तक के दीदार इन नेताओं को हो रहे थे। कोणार्क चक्र के सामने ही खड़े प्रधानमंत्री मोदी इन नेताओं से मिल रहे थे। आइये जानते हैं इन प्रतीकों का महत्व क्या है? 

 
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जी20 शिखर सम्मेलन - फोटो : AMAR UJALA
नई दिल्ली में आज से दो दिवसीय जी20 शिखर सम्मेलन का आगाज हो गया है। जी20 समूह में शामिल देशों के राष्ट्राध्यक्ष, यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि और नौ मेहमान देशों के प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आए हैं। इसके अलावा कई वैश्विक संगठनों के प्रमुख भी इसमें शिरकत कर रहे हैं। कार्यक्रम का आयोजन प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में हो रहा है। जहां मेहमान इकट्ठा हुए हैं वहां भारत और इसके इतिहास का बोध कराने के लिए कई प्रतीकों को भी लगाया गया है।

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के नेताओं का स्वागत कर रहे थे, उस वक्त नटराज प्रतिमा, योग मुद्राओं से लेकर कोणार्क चक्र तक के दीदार इन नेताओं को हो रहे थे। कोणार्क चक्र के सामने ही खड़े प्रधानमंत्री मोदी इन नेताओं से मिल रहे थे। आइये जानते हैं इन प्रतीकों का महत्व क्या है? 
 

योग मुद्राओं के पास से गुजरते जी20 समूह के मेहमान - फोटो : sansad tv
घेरंड संहिता के 32 योगासनों का दर्शन 
भारत की अध्य्क्षता में हो रहे 18वें जी20 शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली में बने भारत मंडपम हो रहा है। सुबह 10:30 बजे वैश्विक नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों का आयोजन स्थल भारत मंडपम पर आगमन होना शुरू हुआ। मेहमान जैसे ही भारत मंडप के अंदर आए तो उन्हें एक शानदार गलियारे से गुजरकर आयोजन स्थल पहुंचना था। मेहमान राष्ट्रीय झंडों के बीच लाल कालीन पर चले और दीवारों पर अंकित विभिन्न योग मुद्राओं को देखा। दीवार पर 32 अनिवार्य योग आसन प्रदर्शित थे जो कि घेरंड संहिता के 17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध के पाठ से लिए गए थे।

योग मुद्राओं के पास से गुजरते जी20 समूह के मेहमान - फोटो : sansad tv
महर्षि घेरंड ने शारीरिक स्थिरता के लिए 32 आसनों की शिक्षा दी थी
कहा जाता है कि महर्षि घेरंड ने राजा चण्डकपालि को शारीरिक स्थिरता के लिए 32 आसनों की शिक्षा दी थी। वे कहते हैं कि इस जगत में जितने भी प्राणी हैं, उन सभी की सामान्य शारीरिक स्थिति को आधार बनाकर एक-एक आसन की खोज की गयी है। घेरंड संहिता में आसनों का वर्णन द्वितीय साधन में किया गया है। 

नटराज प्रतिमा के पास से गुजरते जी20 समूह के मेहमान - फोटो : ANI
अष्टधातु से बनी नटराज प्रतिमा का दीदार
योग मुद्राओं की दीवार के बगल से गुजरने के बाद सभी मेहमान नटराज की प्रतिमा  के बगल से गुजरे। नटराज की यह प्रतिमा अष्टधातु से बनाई गई है। नटराज को भगवान शिव का रूप माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव इस रूप में तांडव नृत्य की एक मुद्रा में हैं। 

नटराज प्रतिमा के पास से गुजरते जी20 समूह के मेहमान - फोटो : sansad tv
ये है मूर्ति की खासियत
तमिलनाडु के स्वामी मलाई के प्रसिद्ध मूर्तिकार राधाकृष्णन स्थापति और उनकी टीम ने नटराज की इस मूर्ति को बनाया है। चोल साम्राज्य के समय से राधाकृष्णन के पूर्वज मूर्तियां बनाते आ रहे हैं। यह मूर्ति अष्टधातु- कॉपर, जिंक, टिन, सिल्वर, गोल्ड, मरकरी और आयरन से बनाई गई है। इस मूर्ति का 'लॉस्ट वैक्स मेथड' से निर्माण किया गया है। इस विधि से चोल साम्राज्य में भी मूर्तियों को बनाया जाता था। लॉस्ट-वैक्स मेथड को छह हजार साल से ज्यादा पुराना माना जाता है। सदियों तक लॉस्ट वैक्स मेथड से धातु की मूर्तियां बनाई जाती रहीं। चोल साम्राज्य में इस मेथड का खूब इस्तेमाल किया गया था। 
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत मंडपम में लगाई गई नटराज की मूर्ति थिल्लई नटराज मंदिर, उमा माहेश्वरार मंदिर और बृहदेश्वर मंदिर में स्थापित मूर्तियों से प्रेरित है। इन तीनों मंदिरों का चोल साम्राज्य में 9वीं से 11वीं सदी के बीच निर्माण किया गया था। चोल साम्राज्य का इस दौरान भारत के एक बड़े इलाके तक शासन था। चोल साम्राज्य में कला और संस्कृति को बहुत बढ़ावा मिला।

मेहमानों से मिलते पीएम मोदी - फोटो : सोशल मीडिया
13वीं शताब्दी के कोणार्क चक्र के सामने मेहमानों का स्वागत 
नटराज की मूर्ति के बाद सभी देशों और संगठनों के ध्वज लगे थे। यहां से गुजरते ही भव्य कोणार्क चक्र की प्रतिकृति के पास सभी नेता पहुंच रहे थे। जहां पहले से खड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन नेताओं का स्वागत कर रहे थे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के साथ इन वैश्विक नेताओं की तस्वीर खींची जा रही थी। कोणार्क चक्र 13वीं शताब्दी की कलाकृति है। 

जी20 समूह के मेहमान का स्वागत करते पीएम मोदी - फोटो : PTI
राष्ट्रीय ध्वज में भी शामिल
 कोणार्क चक्र 13वीं शताब्दी में राजा नरसिंहदेव-प्रथम के शासनकाल में बने सूर्य मंदिर का विश्व प्रसिद्ध शिल्प है। 24 तीलियों वाला यह चक्र राष्ट्रीय ध्वज में भी शामिल है। चक्र में 7 घोड़े हफ्ते के सात दिन,12 जोड़ी पहिये 12 माह और 24 पहिये 24 घंटों और आठ प्रमुख तीलियां आठ प्रहर  की प्रतीक हैं। रथ के पहियों की व्याख्या जीवन के पहियों के तौर पर की गई है।  ये 12 जोड़ी पहिये 12 राशियों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। चक्र 9 फुट 9 इंच व्यास का है। हर पहिये में आठ चौड़ी और आठ पतली तीलियां हैं। दो चौड़ी तीलियों के बीच की दूरी 3 घंटे (180 मिनट) और पतली तीली (दो चौड़ी तीलियों के बीच) 1.5 घंटे (90 मिनट) की होती है। एक चौड़ी तीली से अगली पतली तीली के बीच 30 मनके होते हैं और प्रत्येक मनका तीन मिनट का प्रतिनिधित्व करता है। प्राचीन काल में दिन का समय जानने के लिए कोणार्क पहियों का उपयोग सौर घड़ी के तौर पर किया जाता था।

प्रधानमंत्री ने सभी राष्ट्राध्यक्षों के साथ इस चक्र के सामने फोटो खिंचाई। वहीं जब अमेरिकी राष्ट्रपति का उन्होंने स्वागत किया तो इस चक्र के बारे में भी उन्होंने जो बाइडन को जानकारी दी। 
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