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Opposition Unity: नीतीश से पहले किसने की विपक्ष एकता की कोशिश, तब क्या हुआ; केसीआर के प्रयास से यह कितना अलग?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 17 Jul 2023 06:14 PM IST

सार

Opposition Unity Timeline: तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव 2019 से ही मोदी विरोधी मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक सफल नहीं हो पाए हैं। इस दौरान उन्होंने कई मुख्यमंत्रियों और पूर्व मुख्यमंत्रियों जैसे अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान, एमके स्टालिन और अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे समेत अन्य नेताओं से मुलाकात की है। वहीं अब बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी इस कोशिश में जुटे हैं। 
 
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विपक्षी एकता - फोटो : AMAR UJALA

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले देश के विपक्षी दलों ने भाजपा को घेरने की मुहीम तेज कर दी है। इसी कड़ी में विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेताओं की आज से बेंगलुरु में दो दिवसीय एकता बैठक हो रही है। यह इन नेताओं की दूसरी बैठक होगी। इससे पहले 23 जून को पटना में 15 दल एकजुट हुए थे। भाजपा विरोधी दलों की ये बैठक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की विपक्षी एकजुटता की कोशिश के बाद हो रही है। इससे पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव समेत अन्य नेता भी इस तरह के प्रयास कर चुके हैं।

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विपक्षी एकता - फोटो : AMAR UJALA
अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले देश के विपक्षी दलों ने भाजपा को घेरने की मुहीम तेज कर दी है। इसी कड़ी में विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेताओं की आज से बेंगलुरु में दो दिवसीय एकता बैठक हो रही है। यह इन नेताओं की दूसरी बैठक होगी। इससे पहले 23 जून को पटना में 15 दल एकजुट हुए थे। भाजपा विरोधी दलों की ये बैठक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की विपक्षी एकजुटता की कोशिश के बाद हो रही है। इससे पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव समेत अन्य नेता भी इस तरह के प्रयास कर चुके हैं।

उद्धव ठाकरे और शरद पवार से मिले तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव - फोटो : ANI
आइए जानते हैं कि विपक्षी एकता का प्रयास कब-कब किया गया? ये कोशिशें किनके द्वारा हुईं? इनका नतीजा क्या निकला? विपक्षी एकता को लेकर अब क्या हुआ? 

विपक्षी एकता का प्रयास कब-कब किया गया?
के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) 2019 से ही मोदी विरोधी मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक सफल नहीं हो पाए हैं। इन वर्षों में उन्होंने इस प्रयास में मुख्यमंत्रियों और पूर्व मुख्यमंत्रियों अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान, एमके स्टालिन और अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे जैसे अन्य नेताओं से मुलाकात की है। उन्होंने हमेशा कहा कि वह गैर-भाजपा और गैर-कांग्रेस मोर्चा चाहते हैं। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में उनके कई बयानों ने भी राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ी भूमिका के लिए उनकी महत्वाकांक्षाओं के संकेत दिए हैं। 

केजरीवाल-केसीआर - फोटो : social media
केसीआर के विपक्षी एकता के प्रयासों की टाइमलाइन 
दिसंबर 2021: केसीआर ने एमके स्टालिन से मुलाकात की

केसीआर ने दिसंबर 2021 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से मुलाकात की। यह देश भर के गैर-भाजपा नेताओं के साथ कई बैठकों में से पहली थी। बैठक को औपचारिक रूप से एक शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन बैठक को विपक्ष की एकता के आह्वान के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण थी।

जनवरी 2022: केसीआर ने कम्युनिस्ट नेताओं से मुलाकात की
केसीआर ने जनवरी 2022 में दो प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टियों सीपीआई और सीपीएम के नेताओं से मुलाकात की। दोनों पार्टियों ने अपनी बैठकों में 'बीजेपी मुक्त भारत' का आह्वान किया। बैठक में भाग लेने वालों ने एक वैकल्पिक राष्ट्रीय विपक्ष का आह्वान किया, क्योंकि उनके अनुसार, कांग्रेस राष्ट्रीय विपक्ष का नेतृत्व करने की स्थिति में नहीं थी। 

जनवरी 2022: केसीआर ने तेजस्वी यादव से मुलाकात की
केसीआर ने 11 जनवरी 2022 को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव से मुलाकात की। बीआरएस सूत्रों के अनुसार उस समय यह कहा गया था कि केसीआर ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से सक्रिय राजनीति में लौटने का अनुरोध किया था।  बैठक में विपक्षी एकता की बात भी दोहराई गई। 

फरवरी 2022: केसीआर ने उद्धव ठाकरे, शरद पवार से मुलाकात की
केसीआर ने 20 फरवरी 2022 को महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन के साथी नेता और एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की। उस समय उद्धव शिवसेना के नेतृत्व वाले महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन के साथ महाराष्ट्र चला रहे थे, जिसमें कांग्रेस और एनसीपी भी शामिल थे। 

केसीआर ने अपनी बैठकों में भाजपा द्वारा देश को चलाने के तरीके में बड़े बदलाव का आह्वान किया और जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग की निंदा की।

मार्च 2022: केसीआर ने हेमंत, शिबू सोरेन से मुलाकात की
केसीआर ने चार मार्च 2022 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संरक्षक शिबू सोरेन से मुलाकात की। हालांकि, इस दौरान केसीआर ने इस बात से इनकार किया कि वह भाजपा या कांग्रेस के खिलाफ कोई मोर्चा बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि समान विचारधारा वाले नेताओं को जोड़ने के लिए प्रयास शुरू हो गए हैं।

मई 2022: केसीआर ने अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव से मुलाकात की
केसीआर ने 21 मई 2022 को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। केजरीवाल और केसीआर ने दिल्ली के एक मोहल्ला क्लिनिक और एक स्कूल का भी दौरा किया। दौरे के बाद रिपोर्ट में कहा गया, 'केसीआर कांग्रेस को छोड़कर सभी समान विचारधारा वाले दलों के साथ भाजपा विरोधी गठबंधन (तीसरा मोर्चा) बनाने का प्रयास कर रहे हैं।'

मई 2022: केसीआर ने एचडी देवेगौड़ा से मुलाकात की
जनता दल (सेक्युलर) सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के साथ बैठक 26 मई 2022 को हुई। इसमें, केसीआर ने राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव के लिए अपना आह्वान दोहराया और राष्ट्रीय राजनीति में अपने प्रवेश के संकेत दिए। 

जुलाई 2022: केसीआर ने अखिलेश यादव से मुलाकात की
कुछ ही महीनों के भीतर अपनी दूसरी मुलाकात में केसीआर ने 29 जुलाई 2022 को सपा नेता अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह बैठक उन खबरों के बीच हुई जब केसीआर सक्रिय रूप से एक गैर-भाजपा राजनीतिक मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे थे और भाजपा के विरोधी क्षेत्रीय नेताओं का समर्थन मांग रहे थे।

अगस्त 2022: केसीआर ने नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव से मुलाकात की
31 अगस्त 2022 को केसीआर और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बीच बैठक हुई। इसके कुछ दिन बाद ही नीतीश भाजपा को छोड़कर राजद के नेतृत्व वाले गुट में शामिल हो गए। 

नीतीश के साथ एक पीसी में केसीआर ने विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में नीतीश की उम्मीदवारी को बार-बार नकार दिया। मीडिया के बार-बार सवाल पूछने पर नीतीश अपनी कुर्सी से उठ गए और बार-बार केसीआर को भी वहां से चले जाने के लिए कहा, लेकिन केसीआर बैठे रहे और प्रेस से सवाल पूछते रहे। 

सितंबर 2022: केसीआर ने कम्युनिस्ट नेताओं से मुलाकात की
केसीआर ने तीन सितंबर 2022 को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेताओं से मुलाकात की और वामपंथी नेताओं ने 'सांप्रदायिक ताकतों' के खिलाफ लड़ाई में उन्हें समर्थन दिया। 

अक्तूबर 2022: टीआरएस का नाम बदला 
पिछले साल दशहरे के दिन तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने अपनी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) का नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) कर दिया। ये रीब्रांडिंग जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी और तमिलनाडु के विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) नेता थोल थिरुमावलवन की उपस्थिति में की गई और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने भी इसका स्वागत किया। 

जनवरी 2023: विपक्षी दलों के साझा किया मंच 
तेलंगाना में सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने इसी साल 18 जनवरी को खम्मम में एक जनसभा का आयोजन किया। इसकी अगुआई तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने खुद की। राव के बुलावे पर कई बड़े दलों के नेता पहुंचे। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप मुखिया अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, केरल के मुख्यमंत्री और सीपीआई (एम) नेता पिनाराई विजयन, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और सीपीआई महासचिव डी. राजा शामिल हुए। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) का नाम बदलकर बीआरएस किए जाने के बाद यह पहली सार्वजनिक बैठक थी। 

नीतीश कुमार राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं से मिल चुके हैं। - फोटो : अमर उजाला
नीतीश की विपक्षी एकुजटता की कोशिशें 
केसीआर के अलावा नीतीश कुमार ने विपक्षी दलों को एक साथ लाने की कोशिश की जिसमें वो अभी तक सफल भी रहे हैं। पिछले साल अगस्त में उन्होंने बिहार में एनडीए के मुख्यमंत्री के रूप में अपना इस्तीफा सौंप दिया और आरजेडी के नेतृत्व वाले समूह में शामिल होकर सरकार बना ली। नीतीश कुमार ने पिछले कुछ महीने में देशभर में जमकर दौरे किए हैं। उनका लंबी यात्रा दिल्ली से पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र तक रही।

विपक्ष को एकजुट करने के लिए, नीतीश और उनके सहयोगी राजद नेता तेजस्वी यादव ने पहली बार 12 अप्रैल को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की थी। राहुल ने नीतीश के साथ इस बैठक को विपक्षी एकता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।

इसके बाद कुमार ने अन्य विपक्षी नेताओं के साथ बैठकें शुरू कीं। अप्रैल में, उन्होंने आप नेता अरविंद केजरीवाल , सपा के अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी सहित अन्य से मुलाकात की। मई में, नीतीश ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन और महाराष्ट्र के नेता राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के शरद पवार और उद्धव ठाकरे से मुलाकात की।

उन्होंने बीजू जनता दल के प्रमुख नवीन पटनायक से भी संपर्क किया। हालांकि, बाद में पटनायक ने घोषणा की कि उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ना जारी रखेगी ।

मई के अंत में उन्होंने अन्य विपक्षी नेताओं के साथ अपनी चर्चा का विवरण साझा करने के लिए राहुल और खरगे से फिर मुलाकात की थी। साथ ही उन्होंने पटना में आयोजित होने वाली विपक्षी नेताओं की पहली बैठक पर भी चर्चा की थी।

पटना में विपक्षी एकता की बैठक। - फोटो : अमर उजाला
पटना में हुई पहली बैठक 
बिहार में 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी का मुकाबला करने की रणनीति बनाने के लिए 15 विपक्षी राजनीतिक दलों की पहली बैठक 23 जून को पटना में हुई। यह बैठक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पटना के एक अणे मार्ग स्थित सरकारी आवास पर हुई। तेजस्वी यादव ने राजद का प्रतिनिधित्व किया। सभा में ममता बनर्जी, हेमंत सोरेन, एमके स्टालिन, अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान जैसे मुख्यमंत्रियों ने तृणमूल कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, डीएमके और आप का प्रतिनिधित्व किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और उनकी पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी मौजूद रहे। 

इस बैठक को बुलाने की कवायद राज्य के महागठबंधन के घटक दलों जदयू, राजद और कांग्रेस ने की। बैठक में समाजवादी पार्टी, एनसीपी, पीडीपी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, नेशनल कॉन्फ्रेंस और शिव सेना (यूबीटी) के नेता मौजूद रहे। वाम गुट का प्रतिनिधित्व सीपीएम, सीपीआई और सीपीआई (एमएल) ने किया। वहीं बैठक में वरिष्ठ नेताओं के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव, फारूक अब्दुल्ला, शरद पवार, महबूबा मुफ्ती और उद्धव ठाकरे भी मौजूद रहे। हालांकि, इस बैठक में बीआरएस, आरएलडी जैसे कई दलों ने अलग-अलग कारणों से हिस्सा नहीं लिया।

बेंगलुरु में लगे विपक्षी दलों के नेताओं के पोस्टर। - फोटो : अमर उजाला
दूसरी बैठक में बढ़ा कुनबा 
विपक्षी एकता की बढ़ती ताकत को दिखाते हुए बेंगलुरु में आज से शुरू हो रही बैठक में कुल 26 दलों के शामिल होने की उम्मीद है। यह संख्या पटना में हुई बैठक से 10 से भी ज्यादा है। 

ये हैं नई पार्टियां
. मरूमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके)
. कोंगु देसा मक्कल काची (केडीएमके)
. विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके)
. रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी)
. ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक
. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग 
. केरल कांग्रेस (जोसेफ)
. केरल कांग्रेस (मणि)

जानकारी के मुताबिक, इसके अलावा कृष्णा पटेल का अपना दल (कामेरावादी) और एमएच जवाहिरुल्ला के नेतृत्व वाली तमिलनाडु की मनिथानेया मक्कल काची (एमएमके) को भी निमंत्रण भेजे जाने के बाद मोर्चे में शामिल होने की संभावना है। वहीं आरएलडी की ओर से जयंत चौधरी इस जुटान में शिरकत करेंगे जो पहली बैठक में नहीं थे।
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