जब दोकलम के मामले में भारत-चीन के बीच गतिरोध था, उस दौरान भारतीय सेना को यहां तक पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था और वक्त भी लगा था। इसलिए जैसे ही फेसऑफ खत्म हुआ भारत ने दोकला दर्रे तक पहुंचने के लिए तीन नई सड़क बनाने की जिम्मेदारी बीआरओ को सौंपी। कूपूप-भीमबेस एक्सेस के अलावा बीआरओ ने पूर्वी सिक्किम के फ्लैग-हिल से भी एक और नई सड़क बनाई है जो डोकला दर्रे तक पहुंचती है। करीब 38 किलोमीटर लंबी इस रणनीतिक सड़क पर अभी तक काफी काम पूरा हो चुका है। 2020 तक ये खास सड़क भी पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगी।
रोज होती है मुलाकात
भले ही फिलहाल दोकलम विवाद थम गया है, लेकिन यह पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। मामला नियंत्रण में रहे और तनाव न बढ़े इसलिए भारत और चीन के सैन्य कमांडर हर रोज दोकलम में सुबह एकसाथ चाय पीते हैं। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी सीमा (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर पैट्रोलिंग या किसी और विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हैं। अगर कोई मुद्दा न भी हो तो भी कमांडर सुबह जरूर मिलते हैं।
अरुणाचल में भी सड़कें तैयार
बीआरओ सूत्रों की मानें तो छह सड़कों में से तीन पूर्व में हैं तो तीन पश्चिम में हैं। पिछले कुछ वर्षों से लगातार भारत-चीन सीमा के करीब सड़कों का निर्माण कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इसकी वजह से इस क्षेत्र में सैन्य स्थिति भी बदल रही है। अरुणाचल प्रदेश में भी बीआरओ ने कुछ सड़कों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है।
61 सड़कों का काम जारी
सीमा सड़क संगठन की 21 अक्तूबर 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक देशभर के सीमावर्ती इलाकों में 61 सड़कों का निर्माण कार्य चल रहा है। इनमें से एक-चौथाई का काम पूरा कर लिया गया है। बीआरओ के पास लगभग 3300 किलोमीटर लंबी सड़कों का काम है। इनका कार्य 2005 में शुरू हुआ था। अक्तूबर में ही रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने श्योक नदी पर 430 मीटर लंबे पुल के निर्माण की घोषणा की है। यह पुल सिंधु नदी के सम्मान में बनाया जाएगा। यह पुलि 255 किलोमीटर लंबी दार्बुक सड़क को लेह और दौलत बेग ओल्डी सेक्टर को जोड़ेगा।