कोलकाता के भवानीपुर पुलिस स्टेशन में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पार्टी के लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक नई पुलिस शिकायत दर्ज की गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित होने से दो दिन पहले सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक बयान दिए थे।
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर बुधवार को कोलकाता के भवानीपुर पुलिस स्टेशन में एक नई पुलिस शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अभिषेक बनर्जी ने 2 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित होने से दो दिन पहले सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियां की थीं, जो राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती थी।
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यह शिकायत अर्णब कांति घोष नामक व्यक्ति ने दर्ज कराई, जिसे भवानीपुर पुलिस स्टेशन ने आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि शिकायत के आधार पर कोई प्राथमिकी दर्ज की गई है या नहीं। शिकायत में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनसे देश की राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच सकता था।
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने और संविधान की संप्रभुता तथा देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा का संकल्प लेने के बाद अभिषेक बनर्जी पूरे गुजराती समुदाय को ‘गिरोह’ या आपराधिक समूह कैसे कह सकते हैं।
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गुजराती समुदाय के अपमान का आरोप
बनर्जी के खिलाफ दायर शिकायत में कहा गया है कि ऐसी टिप्पणियां न केवल किसी विशेष समुदाय का अपमान हैं, बल्कि भारत की बहुलवादी संस्कृति और सामाजिक सौहार्द पर भी आघात हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि गुजराती समुदाय लंबे समय से पश्चिम बंगाल समेत देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापार, अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास और समाज सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है।
घोष ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि एक लोकसभा सदस्य की ओर से इस तरह की टिप्पणियां गैर-जिम्मेदाराना हैं और उनका उद्देश्य एक विशेष समुदाय को सामूहिक रूप से बदनाम करना है। शिकायत में यह आशंका भी जताई गई कि यदि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे अलग होते और तृणमूल कांग्रेस सत्ता में लौट आती, तो ऐसी टिप्पणियां राज्य में गुजराती समुदाय के खिलाफ राजनीतिक या सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा कर सकती थी।