... तो राफेल पर नहीं मिलेगी गोपनीय जानकारी
भारत और फ्रांस के बीच सामरिक मामलों की गोपनीय जानकारी के संरक्षण को लेकर समझौता हुआ है। यानी दोनों देश कोई भी गोपनीय जानकारी सार्वजनिक नहीं करेंगे। यह करार ऐसे समय में हुआ है जब कांग्रेस रॉफेल डील को लेकर सरकार को घेर रही है। वहीं सरकार ने सौदे की विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया है।
पीएम मोदी ने कहा, आज हमारी सेनाओं के बीच पारस्परिक साजोसामान में मदद को लेकर समझौता हुआ है। मैं इसे हमारे मजबूत रक्षा सहयोग के इतिहास में एक स्वर्णिम कदम मानता हूं। वहीं राष्ट्रपति मैक्रों ने भारतीय नौसेना के लिए स्कॉर्पियन पनडुब्बी और वायुसेना के लिए लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, भारत ने रॉफेल लड़ाकू विमान को लेकर संप्रभु फैसला किया है। हम इस मामले में हो रही प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं। हम इसे जारी रखना चाहते हैं। यह लंबे समय का अनुबंध है। इससे दोनों को परस्पर लाभ होगा। मेरा मानना है कि यह हमारे सामरिक सहयोग के केंद्र में है। भारत ने वर्ष 2016 में फ्रांस सरकार के साथ 58,000 करोड़ रुपये में 36 रॉफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का सौदा किया था।
कांग्रेस सरकार से इस सौदे का विस्तृत ब्यौरा देने की मांग कर रही है। उसका आरोप है कि उसके समय में हुए करार में इन विमानों की कीमत काफी कम थी, जबकि नए सौदे में प्रत्येक विमान के लिए 351 करोड़ रुपये ज्यादा चुकाए गए हैं। इसके लिए कांग्रेस फ्रांस की ओर से कतर और मिस्र को बेचे गए रॉफेल विमानों का हवाला दे रही है।