भारत और फ्रांस ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग तेज करने पर सहमति जताई है। दोनों देश इसका इस्तेमाल समुद्री क्षेत्र में करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच शनिवार को हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने जैतापुर परमाणु संयंत्र का काम तेज करने का फैसला किया है।
इसरो और सीएनईएस के बीच समझौता
समुद्र में पोतों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए होगा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और सेंट्रल नेशनल डि’इट्यूड्स स्पेसियल्स (सीएनईएस) ने दोनों देशों के हितों वाले समुद्री क्षेत्र में पोतों का पता लगाने, पहचान करने और उन पर निगरानी रखने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत और फ्रांस के बीच अंतरिक्ष के क्षेत्र में पांच दशक पुराने मजबूत रिश्ते हैं।
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों ने जैतापुर परमाणु संयंत्र का काम तेजी से पूरा करने को लेकर करार किया है। इंडस्ट्रियल वे फॉरवर्ड एग्रीमेंट पर ईडीएफ, फ्रांस और न्यूक्लियर पॉवर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने हस्ताक्षर किए हैं। ईडीएफ जैतापुर में छह परमाणु संयंत्र लगाएगा। इसमें प्रत्येक की क्षमता 1650 मेगावाट होगी। महाराष्ट्र के तटीय इलाके में बनने वाला यह संयंत्र देश का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पार्क होगा।