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अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी बढ़ेगी भारत और फ्रांस की दोस्ती, मोदी-मैक्रों में दिखी नई केमिस्ट्री

Sat, 10 Mar 2018 09:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत और फ्रांस ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग तेज करने पर सहमति जताई है। दोनों देश इसका इस्तेमाल समुद्री क्षेत्र में करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच शनिवार को हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने जैतापुर परमाणु संयंत्र का काम तेज करने का फैसला किया है।

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इसरो और सीएनईएस के बीच समझौता

समुद्र में पोतों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए होगा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और सेंट्रल नेशनल डि’इट्यूड्स स्पेसियल्स (सीएनईएस) ने दोनों देशों के हितों वाले समुद्री क्षेत्र में पोतों का पता लगाने, पहचान करने और उन पर निगरानी रखने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत और फ्रांस के बीच अंतरिक्ष के क्षेत्र में पांच दशक पुराने मजबूत रिश्ते हैं। 

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों ने जैतापुर परमाणु संयंत्र का काम तेजी से पूरा करने को लेकर करार किया है। इंडस्ट्रियल वे फॉरवर्ड एग्रीमेंट पर ईडीएफ, फ्रांस और न्यूक्लियर पॉवर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने हस्ताक्षर किए हैं। ईडीएफ जैतापुर में छह परमाणु संयंत्र लगाएगा। इसमें प्रत्येक की क्षमता 1650 मेगावाट होगी। महाराष्ट्र के तटीय इलाके में बनने वाला यह संयंत्र देश का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पार्क होगा।
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पीएम ने 18वीं सदी से चले आ रहे संबंधों का जिक्र किया

- फोटो : ravi batra
भारत-फ्रांस का एक मंच पर आना शांतिपूर्ण विश्व का संकेत : मोदी

दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच गजब की केमिस्ट्री देखने को मिली। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक 14 समझौतों के बाद दिए संयुक्त बयान में मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच सामरिक रिश्ता भले ही 20 साल पुराना हो लेकिन सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं। भारत और फ्रांस का एक मंच पर होना सुनहरे और शांतिपूर्ण विश्व का संकेत है। हम दोनों सिर्फ दो लोकतंत्र के नेता नहीं हैं, बल्कि दो समृद्ध और समर्थ विरासतों के उत्तराधिकारी भी हैं।

पीएम ने 18वीं सदी से चले आ रहे संबंधों का जिक्र किया

उन्होंने कहा कि भाईचारा, समानता और स्वतंत्रता फ्रांस के मूल्यों में है और साथ यह भारत के संविधान में भी समाहित है। इतना ही नहीं मोदी ने दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि फ्रांस के विद्वानों और विचारकों ने 18वीं सदी से ही रामायण, महाभारत और पंचतंत्र की कहानियों के जरिये भारत को समझने की कोशिश की। 

आज का सुसज्जित मंच उन्हीं कोशिशों का नतीजा है। मैक्रों में मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि भारत फ्रांस का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार है। हम चाहते हैं के फ्रांस यूरोप में भारत के प्रवेश का केंद्र बिंदु बने।
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